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Rohtak News: थिएटर को आकार देने में महिलाओं का है विशेष योगदान

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6-राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में आयोजित अपरा​जिता कार्यक्रम में शामिल महिलाएं व छात्र
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रोहतक। रंगमंच एवं फिल्म कलाकार संगीता किमोठी का कहना है कि थिएटर केवल एक्टिंग नहीं बल्कि आत्मविश्वास व सीखने का जरिया है। इसके जरिए महिलाओं ने सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। थिएटर को आकार देने में महिलाओं का विशेष योगदान रहा है। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में वीरवार को आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रही थीं। यहां कॉलेज की छात्राएं भी उपस्थित रहीं।
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महिलाओं ने रंगमंच की विधाओं में अपना वर्चस्व स्थापित किया है। पहले रामलीला में सिर्फ पुरुष ही महिलाओं का किरदार निभाते थे। अब महिलाएं भी आगे आ रही हैं। पहले महिलाओं में कला को शर्म व इज्जत से आंका जाता था। इस प्रकार की कुरीतियों पर नाटक व रंगमंच के माध्यम से ही प्रहार किया है।
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- संगीता किमोठी, रंगमंच एवं फिल्म कलाकार
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कुछ करने के लिए खुद को मजबूत बनाना पड़ता है। मैं वर्ष 1976 में नाट्य कला से जुड़ी थीं। इस समय महिलाएं पढ़ी-लिखी भी कम होती थीं। महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अनेक नाटक तैयार किए व कई कंपनियों के साथ काम किया।
- निर्मल पन्नू, हरियाणवी नाट्य कलाकर

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कोई काम करने के लिए अभिभावकों के साथ विश्वास बनाना पड़ता है। ऐसा नहीं कि नाटक, नृत्य व अन्य कला बड़े लोग या पुरुष ही कर सकते हैं। महिलाएं व लड़कियां भी अपनी विधा को निखारकर बहुत कुछ कर सकती हैं।
- डॉ. नीलम मंगला, आईसी कॉलेज
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पढ़ाई के साथ अपनी कला को खत्म नहीं करना चाहिए। बहुत सी महिला रंग कर्मियों ने समाज को सकारात्मक संदेश दिया है। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अवसर पाने के लिए अभिभावकों से भी विश्वास बनाना पड़ता है।
- अंजू सैनी, नगर निगम वार्ड-8 पार्षद

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हमारी कमी है कि सभी के सामने बोल नहीं पाते हैं। रंगमंच के जरिए खुद में बदलाव लाना संभव है। बोलने की झिझक दूर होती है। बात रखने का हौसला मिलता है। महिलाएं इच्छा रखती हैं लेकिन वह कर नहीं पाती।
- नेहा, छात्रा
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थिएटर केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज का आईना है। इस आईने को आकार देने में महिलाओं का योगदान विशेष रहा है। पर्दे के पीछे से कहानियों को जीवंत करने वाली महिला निर्देशक व लेखक सराहनीय हैं।
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- मनीषा, शिक्षिका, सैनी कन्या स्कूल
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थिएटर महिलाओं को आत्मविश्वास व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। महिला कलाकारों ने नाटकों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया है। उन्हीं की वजह से महिलाएं अपने आपको समयानुसार ढाल रही हैं।
- प्रीति, शिक्षिका, सैनी सैनी कन्या स्कूल
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