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Rohtak News: 29.25 लाख की धोखाधड़ी मामले में महिला को 5 साल सजा

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रोहतक। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (जेएमएफसी) अमनदीप की अदालत ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (एलआईसी एचएफएल) से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 29.25 लाख रुपये का होम लोन लेने के मामले में आरोपी रीना को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे पांच साल के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले में नामजद चार अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार एलआईसी एचएफएल के एरिया मैनेजर प्रमोद कुमार ने वर्ष 2017 में सिविल लाइंस थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि रीना ने खुद को सोनीपत जिले के एक सरकारी स्कूल में गणित अध्यापिका बताकर होम लोन के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ वेतन पर्ची, फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट समेत अन्य दस्तावेज जमा कराए गए थे।
जांच के दौरान कंपनी को पता चला कि रीना संबंधित स्कूल में कार्यरत ही नहीं थी। उसके नाम से जमा कराए गए वेतन संबंधी दस्तावेज, फॉर्म-16 और अन्य रिकॉर्ड फर्जी पाए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दिसंबर 2015 में 29.25 लाख रुपये का होम लोन स्वीकृत किया गया था।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने स्कूल अधिकारियों समेत कई गवाहों के बयान दर्ज कराए। स्कूल के अधिकारी ने अदालत को बताया कि वर्ष 2015-16 के दौरान रीना स्कूल में कार्यरत नहीं थी और उसके नाम से प्रस्तुत दस्तावेज रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रीना ने रोजगार संबंधी जाली दस्तावेजों के आधार पर होम लोन हासिल कर शिकायतकर्ता कंपनी को धोखा दिया। साथ ही फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर उनका इस्तेमाल भी किया।
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सह आरोपी मनोज रैनाल, अंकित गर्ग, राजेश राठी और ईश्वर चंद के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
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