रोहतक। महम चौबीसी के गांव मदीना की महिला की बीमा पॉलिसी के दो दिन बाद ही मौत हो गई। महिला कैंसर से पीड़ित थी। बीमा कंपनी ने यह कहकर बीमा राशि देने से इन्कार कर दिया कि महिला ने बीमारी की जानकारी छिपाई गई। साथ ही पॉलिसी की रसीद महिला की मौत के बाद जारी हुई। आयोग ने महिला के बेटे की अर्जी को स्वीकारते हुए बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि बीमा की 8 लाख रुपये की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित दी जाए। साथ ही कंपनी 5 हजार रुपये हर्जाने व 5 हजार कानूनी खर्च के तौर पर दे।
मदीना निससी बिट्टू ने 2021 में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अर्जी दी कि उसकी मां शीला देवी ने 13 सितंबर 2020 को एक-एक लाख रुपये में चार पॉलिसी ली। इसके लिए प्रीमियम राशि दी। 14 सितंबर से पॉलिसी शुरू हुई। 15 सितंबर की रात को उसकी मां की मौत हो गई। जब उन्होंने दस्तावेज जमा करवाकर बीमा कंपनी से चारों पॉलिसी के तहत राशि मांगी तो कंपनी ने इन्कार कर दिया। कंपनी की ओर से कहा गया कि चारों पॉलिसी की रसीद महिला की मौत के बाद जारी हुई हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया। महिला की मौत 15 सितंबर को सुबह साढ़े 9 बजे हुई है, जबकि पॉलिसी की रसीद उसी दिन दोपहर बाद जारी हुई हैं। शीला के बेटे बिट्टू ने आयोग में अर्जी दी। इस पर आयोग ने बीमा कंपनी को नोटिस दिया।
14 सितंबर को जमा कराई जा चुकी थी प्रीमियम राशि
सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में नाकाम रही कि महिला की मौत 15 सितंबर की सुबह हुई है। दूसरा, परिजनों की ओर से बीमा के लिए प्रीमियम राशि 14 सितंबर को जमा कराई चुकी थी। ऐसे में बीमा राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित दी जाए। साथ ही पीड़ित को हर्जाना और कानूनी फीस भी दे।