रोहतक। चमारिया गांव के भूप उर्फ भूल्ला हत्याकांड में एएसजे रजनी यादव की अदालत ने नौ अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया क्योंकि गवाह अदालत में यह नहीं बता सके कि आरोपियों में से किसने गोली चलाई।
बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि जून 2020 में चमारिया गांव निवासी कुलदीप उर्फ नन्हा ने शिकायत दी कि वह अपने भाई भूप उर्फ भूल्ला के साथ साइकिल पर बैठकर खेत में जा रहे थे। शाम करीब पौने छह बजे रास्ते में सड़क में गड्ढे होने के कारण वह साइकिल से नीचे उतर गए।
भूप जब आगे गया तो सड़क पर खड़ी एक गाड़ी से गांव निवासी प्रदीप व अन्य उतरे। आरोपियों ने उनके भाई को गोलियां मार दी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने मामले में नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तभी से जिला अदालत में मामले की सुनवाई चल रही थी।
वकील ने बताया कि गवाही के दौरान पीड़ित पक्ष यह नहीं बता सका कि आरोपियों में से किसने गोलियां चलाईं जबकि पुलिस केवल आरोपी हरदीप, अंकित व संदीप से ही हथियार बरामद कर सकी थी। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने आरोपी दक्षिण दिल्ली निवासी हरदीप, सोनीपत के गांव गौरड़ निवासी संदीप, चमारिया निवासी रिंकू उर्फ बोस, झज्जर के बेरी निवासी अंकित, बिरधाना गांव निवासी स्वराज, प्रदीप, मीना, मुकेश व विक्रम को बरी कर दिया।