इनेलो प्रमुख अभय चौटाला ने कहा कि उन्होंने अपने भतीजों से उसी दिन संबंध खत्म कर दिए थे, जिस दिन उन्होंने देवीलाल की पीठ में छुरा घोंपा था। अभय रविवार को मकड़ौली टोल प्लाजा पर चल रहे किसानों के धरने को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर हमला बोला, लेकिन खास निशाने पर जेजेपी ही रही। सियासत के मंझे खिलाड़ी की तरह उन्होंने कृषि कानूनों के समर्थन को लेकर जेजेपी के खिलाफ बने माहौल को भांपने और किसानों की नब्ज पकड़ने की कोशिश की। वह जेजेपी में गए पार्टी के परपंरागत वोट बैंक को किसान आंदोलन के जरिये वापस लाने की कवायद में लगे रहे, भीड़ से उनको सकारात्मक समर्थन भी मिला।
अभय ने कहा कि उनके भतीजों ने जेजेपी बना ली, उन्होंने कुछ नहीं कहा। वह देवीलाल की फोटो लगाते थे, उनका सम्मान करते थे। लेकिन जिस दिन उन्होंने भाजपा को समर्थन दे दिया, उन्होंने सारे रिश्ते खत्म कर लिए। इनेलो प्रमुख ने कहा कि आंदोलन उसी दिन शुरू हो गया था जिस दिन केंद्र ने तीन अध्यादेश पारित किए थे। उन्होंने माहिरों से तीनों पर राय ली तो पता चला कि ये किसानों को बर्बाद कर देंगे। उसी समय उनकी पार्टी ने जिलास्तर पर इनके विरोध का फैसला किया। विधानसभा में उन्होंने कृषि कानूनों पर चर्चा की मांग की तो सीएम मनोहर लाल खुद ही प्रस्ताव ले आए। पर किसानों की आवाज उठाने के बजाय कांग्रेस ने वाकआउट किया। किसानों की हितैषी कहलाने वाली जजपा के विधायकों ने एक शब्द नहीं बोला, सिर्फ उन्होंने ही कानूनों पर एक घंटा किसानों की आवाज बुलंद की। फिर आंदोलन के पक्ष में उन्होंने हरियाणा में ट्रैक्टर यात्राएं की। सबसे पहले उन्होंने एलान किया कि अगर 26 जनवरी तक केंद्र सरकार ने कुछ नहीं किया तो वह इस्तीफा देंगे। 26 जनवरी को भाजपा ने किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रची। 26-27 को बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें फोन कर कहा कि अब तो आंदोलन खत्म ही है, इस्तीफे से क्या होगा, करियर खत्म हो जाएगा। लेकिन मैंने कहा कि मेरा इस्तीफा आंदोलन को मजबूत करेगा और ऐसा ही हुआ। चौटाला ने कहा कि सत्ता में जो लोग हैं, उन्होंने कभी आंदोलन किया ही नहीं। हमेशा हिंदू-मुस्लिम, हिंदू-सिख, पटेल, मराठा आदि को बांटने, लड़ाने की साजिश रची। उन्हें समझना चाहिए कि आंदोलन से ही देश आजाद हुआ था, जिसमें किसानों का बड़ा योगदान था। अब भी आंदोलन को चार माह एक दिन हो गए हैं, अगर आंदोलन चार साल चला तो भी किसान पीछे नहीं हटेंगे। इनेलो प्रमुख ने धरने के लिए 21 हजार की आर्थिक सहायता देते हुए कहा कि वह हर तरह से आंदोलन की मदद करेंगे, जब भी बुलाया जाएगा, वह आएंगे। भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल ने कहा कि सरकार आंदोलन को कुचलने की चाहे जितनी कोशिश कर ले, कामयाब नहीं होगी क्योंकि यह आम लोगों का आंदोलन बन चुका है। इस मौके पर धरना अध्यक्ष राजू मकड़ौली भी मौजूद थे। कार्यक्रम में आसपास के गांवों के किसानों के अलावा इनेलो पदाधिकारी भी शामिल हुए।
पंजाब की तरह होगा भाजपा-जजपा का हाल
अभय चौटाला ने कहा कि पंजाब में भाजपा के एक विधायक मलौट में प्रेस कांफ्रेंस करने गए। किसानों को पता लग गया, वे भी वहां पहुंच गए। विधायक को मारा-पीटा गया और उनके कपड़े फाड़ दिए गए। जल्द ही हरियाणा में भी भाजपा और जजपा नेताओं के साथ ऐसा ही होगा। फिर उन्होंने लोगों से पूछा, होगा कि नहीं, लोग बोले, जरूर होगा। चौटाला बोले, यहां कोई भी भाजपा, जजपा नेता आए तो उसके कपड़े उतार कर पोल से बांध दो।
अब बुजुर्गों को बैठाओ धरनों पर
इनेलो प्रमुख ने कहा कि धरने में कई बुजुर्ग हैं और बड़ी संख्या में युवा भी हैं। जल्द ही कटाई का सीजन शुरू होने वाला है, युवा किसानों को खेतों में व्यस्त होना पड़ेगा। हर गांव में आठ-दस जगह बुजुर्ग बैठ कर हुक्का गुड़गुड़ाते हैं और ताश खेलते हैं। युवा खेतों में जाएं तो बुजुर्गों को यहां बैठा दो, ताश खेलेंगे और हुक्का गुड़गुड़ाएंगे। इससे आंदोलन कमजोर नहीं होगा।