रोहतक। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा एक समावेशी संचार है। हमें जल्दी इस सांकेतिक भाषा को सीखने की जरूरत है। यह कहना है महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा का। वे मंगलवार को सेंटर फॉर डिसएबिलिटी स्टडीज (सीडीएस) व चौ. रणबीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज के संयुक्त तत्वावधान में आईएचटीएम काॅन्फ्रेंस हॉल में कार्यक्रम का शुभारंभ कर रहे थे।
इनक्लूसिविटी एट एमडीयू कैंपस के तहत मंगलवार को यूनिटी, इनक्लूसिविटी एंड साइन लैंग्वेज विषय पर स्लोगन राइटिंग व पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम के तहत 25 से 27 सितंबर तक साइन लैंग्वेज वर्कशॉप व 28 सितंबर को- बिल्डिंग एन इंक्लूसिव एंड रेजिलिएंट सोसाइटी : द रोल ऑफ साइन लैंग्वेज विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन आईएचटीएम काॅन्फ्रेंस हॉल में किया जाएगा।
कार्यक्रम का विषय इनक्लूसिविटी एट एमडीयू कैंपस सेलिब्रेट रहा। कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा ने बतौर मुख्यातिथि दीप प्रज्ज्वलित कर अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने सांकेतिक भाषा की विकास यात्रा से अवगत कराया। कहा कि अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा मूक-बधीर जन को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने में अहम है। आमजन इसे सीखने से मूक एवं बधिर जन से जुड़ सकेंगे। उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए सीडीएस व चौ. रणबीर सिंह इंस्टीट्यूट को शुभकामनाएं दीं।
सीडीएस इंचार्ज डाॅ. प्रतिमा देवी ने प्रारंभ में स्वागत भाषण दिया। सीडीएस चीफ कंसल्टेंट प्रो. राधेश्याम ने इनक्लूसिविटी एट एमडीयू कैंपस सेलिब्रेट कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। चौ. रणबीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज के निदेशक प्रो. संदीप मलिक ने सांकेतिक भाषा के महत्व को रेखांकित किया। आयोजन सचिव डाॅ. राजेश कुंडू ने मंच संचालन किया। आयोजन सचिव डाॅ. योगेंद्र सिंह व डाॅ. कपिल मल्होत्रा ने संचालन व समन्वयन सहयोग दिया।
इस मौके पर आईएचटीएम निदेशक प्रो. आशीष दहिया, कैंपस स्कूल की निदेशक प्रो. विनीता शुक्ला, डाॅ. विश्वजीत, डाॅ. विनय, पंकज नैन, सीडीएस के प्राध्यापक, स्टाफ सदस्य, विद्यार्थी और प्रतिभागी विद्यार्थी उपस्थित रहे। सीडीएस कर्मी सुनील कुमार ने आयोजन में सहयोग दिया।