सांपला। क्षेत्र में सिंचाई संकट गहराता जा रहा है। नहरों का व्यापक नेटवर्क होने के बावजूद माइनरों और रजबहों में पानी नहीं पहुंचने से किसान व आम लोग परेशान हैं। जलघर के तालाबों में पानी खत्म हो चुका है। ऐसे में किसानों और ग्रामीणों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है।
भालौठ नहर से दर्जनों माइनर और रजबहे संचालित होते हैं। यह क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था और की रीढ़ माने जाते हैं। वर्तमान में पानी केवल मुख्य नहर तक ही सीमित है। अधिकांश माइनर सूखी पड़ी हैं।
भालौठ सब ब्रांच से गांधरा, अटायल, दतौड़, गिझी, नयाबास समेत दर्जनों गांवों के किसान निर्भर हैं। ऐसे में भीषण गर्मी के बीच फसलों की सिंचाई उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
गिझी निवासी किसान रामप्रसाद, सुरेंद्र, दीपचंद, नयाबास के सतीश कुमार, नरेश कुमार ने कहा कि गांव माइनर की टेल पर लगते हैं। दो माह से पानी नहीं आया है।
सिंचाई विभाग ने 13 जून को नहरों में जल घर के तालाब भरने और सिंचाई के लिए पानी छोड़ा था। एक सप्ताह बाद भी पानी नहीं पहुंचा है। खेत और तालाब दोनों सूखे पड़े हैं। नहरों की सफाई भी नहीं कराई गई।
लोगों ने सिंचाई विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए माइनर की टेल तक पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो फसल को भारी नुकसान होगा। इससे किसानों को बड़ा आर्थिक घाटा उठाना पड़ेगा।
पीने के पानी का और संकट बढ़ेगा। सिंचाई विभाग के एक्सईएन अरुण कुमार मुंजाल ने बताया कि पीछे से कम पानी मिला। अगली बार पूरा पानी मिलेगा।