झुलसाती धूप। गर्म हवा। 41 डिग्री तापमान और टपकता पसीना। पांव में चप्पल, कंधे व गोद में भूख से बिलखते बच्चे और सड़क पर नजरें। यह हाल प्रवासी मजदूरों का है। घर जाने की इंतजार में शहर से निकलने वाले हाईवे पर पैदल जाने वाले, धर्मशाला व छोटूराम स्टेडियम के पास दो दिन से घर जाने के लिए इंतजार में बैठे यूपी, बिहार, एमपी व जम्मू के प्रवासी मजदूरों की जुबां पर एक ही सवाल है, जाने कब आएगी घर ले जाने वाली बस..। अमर उजाला ने जब इनकी समस्या जानने का प्रयास किया तो इनका दर्द फूट पड़ा।
यहां क्या खाएं, मरना है तो घर जाकर ही मरें..
शहर की रामगोपाल कॉलोनी में रहने वाला अनिल शुक्रवार शाम को अपना किराये का कमरा खाली कर चुका है। इसे यूपी के हमीरपुर जाना है। पत्नी व छोटे-छोटे बच्चों के साथ दो दिनों से शीला बाईपास स्थित छोटूराम स्टेडियम के बाहर बैठा है। यह अकेला परिवार ऐसा नहीं है, बल्कि उस सरीखे और भी हैं। इन्हें प्रशासन की ओर से चलाई जा रही रोडवेज बस से घर भेजे जाने की उम्मीद है। अनिल का कहना है कि अब कहां जाएं। यहां क्या खाएं। मरना ही है तो घर जा कर ही मरें.. यहां न काम है न रोटी। घर जाने के लिए स्टेडियम बुलाया था, यहां भी बस नहीं है। भूख से बिलखते बच्चों को देख विकास नगर के सुरेंद्र सिंह ने कुछ दूध, केले व फ्रूटी इन्हें दिलाई तो कुछ राहत मिली।
प्रशासन को कई बार दे चुके नाम, नहीं हो रही सुनवाई
यूपी पीलीभीत के घुचीयाई निवासी कालीचरण, रामकुमार, रितेष, राजेंद्र रविवार सुबह भराण से पैदल चल कर रोहतक पुराना बस अड्डा पहुंचे। ये वहां खेतीबाड़ी का काम करते थे। रबी सीजन की फसल कटाई के बाद काम नहीं रहा है। इसलिए ये सारे दोस्त घर जाना चाहते हैं। इनका कहना है कि यहां शहर थाना में संपर्क किया तो उन्होंने महम जाने की बात कही। जबकि वहां कई बार अपना नाम प्रशासन को दे चुके हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब पैदल वापस कैसे जाएं। सुबह से दोपहर हो गई। भूख लगी तो रेहड़ी से ककड़ी व केले खरीद कर खा लिए।
छोटूराम स्टेडियम में बस के इंतजार में बच्चों के साथ बैठे प्रवासी मजदूर। - फोटो : RohtakCity
जाट कॉलेज मैदान के बाहर बस का इंतजार करते प्रवासी मजदूर। - फोटो : RohtakCity
जाट स्कूल मैदान से यूपी के लिए प्रशासन की ओर से बस चलाने की सूचना पर पहुंची प्रवासी महिलाएं। - फोटो : RohtakCity
लॉक डाउन में रोहतक फसे प्रवासी मजदूर रविवार को पैदल चल कर दिल्ली रोड पर पहुंचे तो भूख लगी तो पेड़ क- फोटो : RohtakCity