संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने मतदाताओं का पसीना छुड़ा दिया है। एसआईआर भरने में मतदाताओं को वर्ष 2002 की जानकारी जुटाने में दिक्कत उठानी पड़ रही है।
जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग की ओर से एसआईआर 15 जुलाई तक कराया जा रहा है। बीएलओ ने लगभग एसआईआर फॉर्म मतदाताओं तक पहुंचा दिए हैं। इस बीच नव विवाहिताओं और एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो चुके मतदाताओं के लिए वर्ष 2002 की सूची के अनुसार जानकारी भरना संकट बन गया है। हालांकि यह जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है लेकिन अक्सर घरों में मौजूद व्यक्ति सक्षम नहीं है।
बीएलओ को 2002 की वोटर लिस्ट से जानकारी मिलान करने में कठिनाई हो रही है। इससे प्रक्रिया धीमी हो रही है। एसआईआर फार्म में जन्मतिथि, आधार, मोबाइल, माता-पिता और पति-पत्नी का नाम भरना अनिवार्य है लेकिन उन विवाहित महिलाओं के फार्म में सबसे अधिक दिक्कत आती है जिनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में मायके के पते पर दर्ज था। शादी के बाद वे ससुराल आ गईं जबकि पुराने दस्तावेजों में उनकी जानकारी मायके के पते से जुड़ी हुई है।
वर्जन
मतदाता निसंकोच एसआईआर गणना फॉर्म भरकर बीएलओ का सहयोग करें। मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है। इसकी शुद्धता सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।- सचिन गुप्ता, जिला उपायुक्त।
एसआईआर के फॉर्म में दो कॉलम है। मतदाताओं को यह समझ नहीं आ रहा है कि दाया कॉलम भरें या बाया भरें। इसमें सबसे अधिक परेशान माताएं हैं।- गौरव, गांधी कैंप।
बीएलओ को सही और स्टीक फॉर्म के भरने की जानकारी देनी चाहिए। घरों में बुजुर्ग होते हैं। बच्चे घरों पर नहीं है। ऐसे हालात में दिक्कत अधिक है।-भूषण लाल, गांधी कैंप
10-रोहतक के गांधी कैंप में एसआईआर फॉर्म वितरित करते बीएलओ व प्रशासनिक कर्मचारी। संवाद
10-रोहतक के गांधी कैंप में एसआईआर फॉर्म वितरित करते बीएलओ व प्रशासनिक कर्मचारी। संवाद