वोटर कार्ड या राशन कार्ड जमीन की मिलकियत का सबूत नहीं हो सकता। राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड को ही मिलकियत का सबूत माना जा सकता है। अदालत ने नगर निगम के हक में फैसला सुनाते हुए कन्हेली गांव के मकान मालिक की याचिका खारिज कर दी।
निगम के रिकार्ड के मुताबिक कन्हेली गांव के एक व्यक्ति ने 2019 में अदालत में याचिका दायर की थी कि उसका 114 वर्ग गज में मकान है। यह मकान उसके पूर्वजों के समय से बना हुआ है। अब वह मकान को नए सिरे से बना रहा है। निगम ने नोटिस देकर काम बंद करवा दिया। जवाब में ने कहा कि नियमों के मकान मालिक को नक्शा पास करवाना चाहिए, साथ ही मिलकियत के सबूत देने चाहिए।
निगम के वकील राकेश सपड़ा ने बताया कि 2010 में शामलात भूमि निगम के नाम आ गई थी, जबकि मकान शामलात भूमि पर बना हुआ है। छह साल के करीब चली कार्रवाई में याचिकाकर्ता कोर्ट में मिलकियत के दस्तावेज जमा नहीं करवा सका। राशन कार्ड या वोटर कार्ड मिलकियत का सबूत नहीं हो सकते। इसके बाद सिविल जज हिमांशु आर्य की अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। कहा कि निगम को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करने से नहीं रोका जा सकता।
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60 से ज्यादा केस चल रहे अदालत में
नगर निगम के जमीन के कब्जे को लेकर 60 से ज्यादा केस अदालत में चल रहे हैं। पिछले साल पुराने बस स्टैंड के पास जमीन की मिलकियत को लेकर सामाजिक संस्था व निगम के बीच चल रहे केस का निर्णय आया था। अदालत ने निगम को जमीन का मालिक माना था। लगातार मजबूती से निगम अदालत में अपना पक्ष रख रहा है।
- संदीप बतरा, भू-अधिकारी नगर निगम