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Rohtak News: आवाज संसाधन ही नहीं, शस्त्र भी है अभिनेता के लिए

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रोहतक। अभिनेता के लिए आवाज संसाधन ही नहीं, शस्त्र भी है। एक्टिंग में आवाज की ऐसी जरूरत होती है, जैसी बैकग्राउंड म्यूजिक की किसी फिल्म में। बैकग्राउंड म्यूजिक उसे अच्छा कहा जाता है, जिसे नोटिस ही न किया जाए। वह सिर्फ उस सीन की भावना को उभारता है। इसी तरह किसी कलाकार को वाॅइस कल्चर की ट्रेनिंग नपी तुली लेनी चाहिए। ज्यादा प्रशिक्षण से वह शायद वॉइस ओवर की दिशा में चला जाए। यह कहना है महाभारत की कालजयी आवाज के धनी वाइस आर्टिस्ट हरीश भिमानी का। वे मंगलवार को पीएलसी सुपवा में विद्यार्थियों को आवाज की बारीकियों के गुर देने पहुंचे थे।
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सुपवा कुलपति गजेंद्र चौहान के साथ पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दो दिवसीय कार्यशाला में आने व कार्य की जानकारी दी।
अनुष्ठान की तरह मैं हर कार्य करता हूं, मेरा स्वभाव है, पहले प्रमाण करता हूं...
अनुष्ठान की तरह मैं हर कार्य करता हूं, मेरा स्वभाव है, पहले प्रमाण करता हूं.. पंक्ति के साथ सम्मानित कलाकार हरीश भिमानी ने अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण में, विशेष रूप से अभिनेताओं के लिए आवाज का प्रशिक्षण खास महत्व रखता है। आमतौर पर एक्टिंग कोर्स में वॉयस ट्रेनिंग को महत्व नहीं दिया जाता है। वास्तविकता यह है कि आवाज अभिनेताओं के लिए सबसे मूल्यवान होती है। सभी शीर्ष अभिनेताओं के पास असाधारण आवाज अनुकूलन है। छात्रों को आवाज का शुरुआती प्रशिक्षण मिल जाता है, तो यह उनके करियर के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि पेशेवर आवाज कलाकारों के पास वृत्तचित्रों, एनीमेशन फिल्मों, टीवी विज्ञापनों, डबिंग, वॉयस ओवर के क्षेत्रों में व्यापक विकल्प हैं।
आवाज प्रशिक्षण की बारीकियों की जानकारी देते हुए कहा कि कार्यशाला में विद्यार्थियों को अभ्यास कराया जा रहा है। उच्चारण और लहज़ा किसी भी निष्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डायलॉग बोल देना ही काफी नहीं है। इसके पीछे के आश्य और सबटेक्स्ट को भी कुशलता से संप्रेषित किया जाना चाहिए। आमतौर पर लोग जितना सोचते हैं, यह उससे कहीं अधिक जटिल है। सुपवा के आधुनिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं ने प्रभावित किया है। उन्होंने इनकी तुलना लॉस एंजिल्स स्टूडियो में उपलब्ध सुविधाओं से करते हुए वाणिज्यिक फिल्म निर्माताओं को स्टूडियो किराए पर देने का भी सुझाव दिया। इससे छात्रों को मुख्यधारा की प्रस्तुतियों से जुड़ने में मदद मिलेगी।
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आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को छात्रवृत्तियों के जरिए मिलेगी मदद

कुलपति गजेंद्र चौहान ने विश्वविद्यालय की पहल साझा करते हुए कहा कि इनमें एडिटिंग क्यूबिकल्स, दो नए फिल्म सेट, व्यायामशाला, बैडमिंटन कोर्ट, क्लिनिक की स्थापना शामिल हैं। इसके अलावा, गेस्ट हाउस का उन्नयन, नए कैमरे और बुनाई करघे की खरीद और शैक्षिक और गैर-शैक्षिक भर्तियां भी की गई। पीएलसी सुपवा में प्रवेश लेने वाली हरियाणा की छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति के वित्तपोषण के लिए कुलपति ने व्यक्तिगत रूप से क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों को अपने साथ जोड़ा। अब तक ऐसी 27 छात्रवृत्तियों की व्यवस्था की जा चुकी है। विवि में प्रदेश की आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को इन छात्रवृत्तियों के जरिए मदद देने में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद लड़कों को अवसर मिलेगा। इसके बाद भी छात्रवृत्ति शेष रहती है तो देश की अन्य छात्राओं व उनके बाद छात्रों को अवसर दिया जाएगा।

मैं समय हूं... ने घर-घर बनाया लोकप्रिय
हरीश भिमानी वॉयसओवर कलाकार एवं एंकर हैं। टीवी धारावाहिक महाभारत के सूत्रधार ''समय'' की आवाज रहे हैं। मैं समय हूं संवाद ने उन्हें घर-घर लोकप्रिय बना दिया। वे वर्ष 1980 से सार्वजनिक कार्यक्रमों और समारोहों की मेजबानी के अलावा कई वृत्तचित्रों, कॉर्पोरेट फिल्मों, फीचर फिल्मों, टेलीविजन और रेडियो विज्ञापनों, खेलों, संगीत एल्बम में अग्रणी आवाज रहे हैं। टेलीविजन न्यूज एंकरिंग से शुरुआत करने वाले हरीश भिमानी देश की जानी पहचानी जाने वाली आवाजों में से एक हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग लक्ष्मीनारायण इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी नागपुर से की। जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन पूरा किया। उन्होंने विज्ञापनों, टीवी प्रोमो, कॉर्पोरेट वीडियो, संगीत एल्बम, ऑडियो पुस्तकों और वृत्तचित्रों की 22,000 से अधिक रिकॉर्डिंग की है। उन्हें वॉयस ओवर/कथन 2015 के लिए (63वें) राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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