रोहतक। शहर के सेक्टर-एक की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी बीटेक पास 27 वर्षीय विवेक नेहरा उर्फ विक्की सियासत में उतरने की तैयारी में था। वह तीन माह से वार्ड नंबर 11 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। मकर संक्रांति पर रविवार को सेक्टर एक के साथ नहर की पटरी के साथ बनी गोशाला में भंडारा लगाना था, जिसके लिए निमंत्रण पत्र भी बांट दिए थे।
नेहरा परिवार की किस्मत में कुछ और ही लिखा था। शुक्रवार की रात सालासर और खाटू श्याम जाते समय महेंद्रगढ़ के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग 152 डी पर विवेक व उसके दोस्तों की कार धुंध में डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में विवेक की मौत हो गई, जबकि उसके दोस्त 21 वर्षीय उमेश, 19 वर्षीय सौरव, 21 वर्षीय प्रदीप और साहिल घायल हो गए। उनको सनसिटी स्थित निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां एक की हालत बताई जा रही है।
एसआई बलराज दहिया ने बताया कि उसका दोस्त राजेंद्र नेहरा सेक्टर एक स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहता है, साथ ही मूलरूप से सुंदरपुर गांव के रहने वाले हैं। राजेंद्र जहां दिल्ली रोड स्थित डीएवी स्कूल में चालक की नौकरी करते हैं, जबकि बड़े बेटे विवेक नेहरा ने एमडीयू से अभी बीटेक की परीक्षा पास की थी। राहुल अभी पढ़ रहा है। बेटी मुस्कान नर्सिंग का कोर्स कर रही है, जिसे राजेंद्र ने बचपन में ही भाई से गोद ले लिया था। बलराज ने बताया कि विवेक की समाजसेवा में रुचि थी। तीन माह से अपने एरिया में सक्रिय था। वार्ड नंबर 11 से इस बार नगर निगम का चुनाव लड़ना चाहता था। इसके लिए वार्ड में जगह-जगह होर्डिंग भी लगा रखे हैं, लेकिन भाग्य में कुछ और ही लिखा था।
पापा, शनिवार देर रात तक लौट आऊंगा
राजेंद्र नेहरा ने बताया कि विवेक रात को करीब 11 बजे उसके पास आया। बोला, पापा मकर संक्रांति पर गोशाला में भंडारा करना है। उससे पहले सालासर जाकर बालाजी व खाटू श्याम के दर्शन करना चाहता हूं। शनिवार को देर रात तक वापस आ जाऊंगा, चार दोस्त भी साथ जा रहे हैं। शनिवार तड़के करीब 4 बजे फोन आया कि विवेक व उसके साथियों की कार महेंद्रगढ़ से आगे 152डी पर डिवाइडर से टकरा गई। वह तत्काल महेंद्रगढ़ के लिए रवाना हुए। विवेक का शव महेंद्रगढ़ के सरकारी अस्पताल में मिला, जबकि चारों घायलों को रोहतक रेफर किया जा चुका था।
गोद ली बहन को बड़ा ऑफिसर बनाने का सपना देखा था विवेक ने
परिजनों ने बताया कि राजेंद्र ने अपने भाई की बेटी मुस्कान को उस समय गोद लिया था, जब वह बहुत छोटी थी। मुस्कान को उसके दोनों भाई विवेक और राहुल बहुत प्यार करते थे। विवेक का सपना था कि उसकी बहन बड़ी ऑफिसर बने। उसे बीएससी नर्सिंग में दाखिला करवा रखा है। हादसे से परिवार के सपने बिखर गए।