रोहतक। बुलंद हौसले के आगे बड़ी से बड़ी कठिनाई बोनी साबित हो जाती है। ऐसा ही कर दिखाया है सुनारिया कलां के बेटे केशव वशिष्ठ ने। मात्र एक साल की उम्र में आंखों की रोशनी खोने वाले इस छात्र ने हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा में 93.2 प्रतिशत अंक हासिल कर विद्यालय में दूसरा स्थान हासिल किया है।
वैश्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आर्ट्स संकाय से पढ़ाई करने वाले केशव ने 500 में से 466 अंक प्राप्त किए हैं। जब केशव एक साल का था तो हृदय संबंधी बीमारी के दौरान आंखों की रोशनी भी चली गई थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी सुनने की क्षमता को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया।
10वीं कक्षा में 76 प्रतिशत अंक लाने के बाद उन्होंने 12वीं के लिए दिन में 14 घंटे रोजाना पढ़ाई की। स्कूल से घर आकर निरंतर अभ्यास किया। विद्यालय प्राचार्य प्रवीण कुमार बंसल ने बताया कि केशव को 12वीं की परीक्षा में कॉमर्स का 11वीं का छात्र ऋषभ राइटर के तौर पर मिला था। आर्ट्स संकाय के केशव की बात समझने में राइटर ऋषभ को कुछ परेशानी भी आई। संवाद
शतरंज में भी माहिर हैं केशव
केशव के दादा राजकुमार बताते हैं कि बचपन से ही केशव की सुनने की क्षमता बेहद तेज है। वह शतरंज भी खेलता है जिससे उसकी एकाग्रता और मजबूत हुई है। पोता राज्यस्तरीय ब्लाइंड फोल्ड चेस प्रतियोगिता में दूसरा दूसरा प्राप्त कर चुका है। केशव के पिता विकास और मां सविता दोनों शिक्षक हैं। उन्होंने बेटे को निरंतर पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। 20 वर्षीय बहन वंशिका एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।
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आईएएस बनना है लक्ष्य : केशव
केशव कहते हैं, अब मैं सिविल सर्विसेज की तैयारी करूंगा। आईएएस बनकर समाज की सेवा करना उनका लक्ष्य है। केशव का कहना है कि अगर हौसला मजबूत हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। उनका परिणाम उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा है जो शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। बच्चों की किसी भी परिस्थिति में हार नहीं माननी चाहिए। पढ़ाई को ही सबसे बड़ा हथियार बनाना चाहिए।