प्रदेश में नामचीन रोहतक की वैश्य शिक्षण संस्था। सालभर चले विवाद और लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार शुक्रवार को संस्था में गवर्निंग बॉडी और पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। कॉलेजियम सदस्य, प्रत्याशी, प्रशासन सब तैयार। वोटिंग भी हुई और मतगणना भी। लेकिन दूल्हा-दुल्हन के राजी होने के बाद भी काजी अड़ गए। प्रत्याशियों को ये तो बता दिया गया कि किसको कितने वोट मिले। प्रत्याश्यिों ने मतगणना के बाद हार-जीत भी तय कर ली, लेकिन चुनाव अधिकारी की ओर से किसी के हार-जीत की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई और न ही विजेताओं को प्रमाण पत्र दिए गए। हालांकि राजेंद्र बंसल गुट ने मतों की गणना के हिसाब से बाजी मार ली। राजेंद्र बंसल ने अपने प्रतिद्वंद्वी पवन खरकिया से 10 वोट ज्यादा लेकर प्रधानी तो कब्जाई ही साथ ही अपने गुट के तीन और प्रत्याशियों को विजयश्री दिलाई। पवन खरकिया पैनल से सिर्फ सचिव पद के प्रत्याशी विजया गुप्ता को छोड़कर बाकी चारों पदाधिकारियों को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि कॉलेजियम सदस्य सुरेश गुप्ता की एक याचिका पर मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते फिलहाल किसी भी विजेता की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। चुनाव में दो पैनल ही आमने-सामने थे।
इससे पहले, वैश्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल में चुनाव अधिकारी अरविंद मल्हान की देखरेख में सुबह आठ बजे नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। नामांकन में राजेंद्र बंसल और पवन खरकिया पैनल ने अपनी दावेदारी पेश की। शुरू से ही दो पैनल आमने-सामने थे और आखिरी मौके तक इन्हीं के बीच टक्कर बनी रही। नामांकन के बाद अन्य प्रक्रिया हुई और तीन बजे वोटिंग शुरू कर दी गई। गवर्निंग बॉडी चुनने के लिए 98 कॉलेजियम सदस्यों को वोटिंग करनी थी, लेकिन शाम छह बजे तक 95 वोटरों ने ही वोटिंग की। दो वोटर आउट ऑफ स्टेशन बताए गए, जबकि दिल्ली से आए एक कॉलेजियम सदस्य वीरेंद्र कुमार छह बजे के बाद पहुंचे। इस कारण वे वोट नहीं डाल सके। शाम छह बजे मतगणना शुरू की गई। करीब एक घंटे तक चली मतगणना के बाद चुनाव अधिकारी की तरफ से बताया गया कि किस प्रत्याशी को कितनी वोट मिली हैं। इसमें प्रधान पद के दावेदार राजेंद्र बंसल ने 52 वोट हासिल की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पवन खरकिया को 42 वोट मिली। अन्य प्रत्याशियों को भी वोट बता दी गई।
कुछ इस तरह मिली वोट
प्रत्याशी वोट फैसला
प्रधान
राजेंद्र बंसल 52 जीते
पवन खरकिया 42 हारे
उप प्रधान
विनय जैन 61 जीते
सुभाष गुप्ता 34 हारे
सचिव
विजय गुप्ता 49 जीते
राजीव गर्ग 46 हारे
सहसचिव
संजय भालौठिया 56 जीते
मनीष जैन 39 हारे
कोषाध्यक्ष
लोकेश जैन 51 जीते
विकास गोयल 44 हारे
एक वोट को लेकर हुआ हंगामा
चुनाव प्रक्रिया दिन भर शांतिपूर्ण रही। शाम छह बजे जैसे ही मतदान केंद्र का गेट बंद किया गया, उसी समय दिल्ली से कॉलेजियम सदस्य वीरेंद्र कुमार वोट डालने के लिए पहुंच गए। लेकिन ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। इस पर वहां काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। कुछ लोगों ने अधिकारियों की इस कार्यशैली का विरोध जताते हुए कहा कि यह सरासर गलत है। कॉलेजियम सदस्य को वोट डालने का अधिकार है। इस पर चुनाव अधिकारी ने निर्धारित समय पर बंद किए गए गेट की वीडियो रिकार्डिंग देखी, जो बिल्कुल सही समय पर थी। आखिरकार कॉलेजियम सदस्य वोट नहीं डाल सके।
यूं बोले चुनाव अधिकारी
चुनाव अधिकारी अरविंद मल्हान ने बताया कि किस प्रत्याशी को कितनी वोट मिली है इसके बारे में बता दिया गया है। फिलहाल सुरेश गुप्ता की याचिका पर हाइकोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण अभी हमने न विजेता घोषित किए हैं और न ही विजेताओं को प्रमाण पत्र दिए गए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 25 जुलाई को होनी है। चुनाव की रिपोर्ट तैयार कर डीसी को सौंप दी गई है, जो भी आदेश होगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा।
समाज के साथ खिलवाड़ : विनय आर्य
चुनाव कराने और फिर प्रमाण पत्र नहीं दिए जाने के मुद्दे पर कॉलेजियम सदस्य विनय आर्य का कहना है कि प्रशासन ने हाइकोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है। सुरेश गुप्ता की याचिका पर स्पष्ट है कि चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए, लेकिन फिर भी प्रशासन ने चुनाव कराए और अब प्रमाण नहीं दिए गए। यह समाज के साथ खिलवाड़ है।
कार्यकारिणी सदस्य में 19 प्रत्याशी थे मैदान में
कार्यकारिणी सदस्य के लिए 19 प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। इसमें अनिल कुमार, आशु गुप्ता, कैलाश, जयदेव, प्रेमचंद तायल, आनंद जैन, मनीष, मुन्नीलाल गर्ग, मनोज कुमार, पवन गुप्ता, मोहन गुप्ता, राजेश, नवीन कुमार, विकास, विवेक गोयल, शंकरलाल, संजय गुप्ता और सुरेश चंद शामिल थे। इसमें आनंद जैन, अनिल और प्रेम चंद तायल को बाकी प्रतिद्वंद्वियों से कम वोट मिली है। बाकी 16 प्रत्याशियों की वोट अधिक होने के कारण उन्हें विजेता माना जाएगा।
सिर्फ एक साल की होगी सत्ता
वैश्य संस्था के चुनाव को लेकर प्रत्याशियों ने पूरे दांवपेंच लड़ाएं। लेकिन खास बात यह है कि इस गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल मात्र एक साल का होगा। पिछले वर्ष गवर्निंग बॉडी समय से पहले भंग होने के कारण यह चुनाव कराया गया है। कॉलेजियम सदस्यों का कार्यकाल एक साल का बाकी है। इस कारण नियमानुसार अगले वर्ष जुलाई माह में फिर से चुनाव होगा। ऐसे में गवर्निंग बॉडी के नए पदाधिकारियों को खुद को साबित करने के लिए एक साल का समय मिला है। यदि इस अवधि में वह संस्था के हित में कार्य कर वोटरों का दिल जीत लेते हैं तो उन्हें दोबारा से जल्द ही मौका मिल सकता है।
वोट नहीं दे सके तो क्या हुआ, चुनाव तो देख सकते हैं
दरअसल, कई आरोपों के चलते संस्था के दो पूर्व प्रधान समेत सात लोगों की सदस्यता कुछ दिन पूर्व प्रशासक ने खत्म कर दी थी। इस मामले को लेकर कोर्ट में भी मामला विचाराधीन है। शुक्रवार को चुनाव के दौरान कई पूर्व पदाधिकारी भी मतदान केंद्र के बाहर चहलकदमी करते दिखाई दिए। वोटरों और पदाधिकारियों के साथ खूब बातचीत कर रहे थे, लेकिन कहीं न कहीं सदस्यता खत्म होने का मलाल उनके मन में जरूर था।
यह है सुरेश गुप्ता की याचिका
कॉलेजियम सदस्य सुरेश गुप्ता की तरफ कुछ दिन पहले हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की अपील थी कि संस्था में भ्रष्टाचार में शामिल रहने वाले पूर्व पदाधिकारियों की सदस्यता खत्म की जाए। इसके बाद ही चुनाव कराया जाए। कानून के जानकारों की मानें तो इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने चुनाव के रिजल्ट पर रोक लगाई है और अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई का समय दिया है।
अधर में न लटक जाए चुनाव
संस्था में चर्चा है कि 25 जुलाई को होने वाली सुनवाई में चुनाव को लेकर कोई फैसला हो सकता है। चर्चा तो यह भी है कि प्रशासन ने जल्दबाजी में यह चुनाव कराया है और हाइकोर्ट में यह रद्द हो सकता है। हालांकि यह तो समय ही बताएगा कि चुनाव रद्द होता है या फिर नहीं।
संस्था के हित में करुंगा काम : राजेंद्र बंसल
हाईकोर्ट ने चुनाव रोकने को लेकर कोई आदेश नहीं दिए हैं। चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ है। समाज के लोगों ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाएगा। संस्था के हित को लेकर सभी के साथ मिलकर कार्य करेंगे।