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वैश्य स्कूल के बाद अब इंजीनियरिंग कॉलेज के कर्मचारियों को निकाला

Wed, 16 Dec 2015 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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वैश्य पब्लिक स्कूल में सोमवार को दिन भर बवाल चलने के बाद मंगलवार को इंजीनियरिंग कॉलेज से भी 34 कर्मचारियों को निकाल दिया गया।
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इस बार कर्मचारियों को सीधे तौर पर न कहकर नौकरी से निकालने जाने का पत्र पोस्ट के माध्यम से उनके घर भेज दिए गए हैं। कर्मचारियों ने प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ बुधवार से कॉलेज में हड़ताल का ऐलान कर दिया है।


बता दें कि वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज से गत सप्ताह 42 कर्मचारियों को निकालने की तैयारी चल रही थी। लेकिन हंगामा होने के बाद डीसी ने यह मामला कुछ दिनों के लिए रोक दिया था। अब तीन दिन पहले वैश्य पब्लिक स्कूल के 24 कर्मचारियों को बाहर निकाला गया था।
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अब मंगलवार को इंजीनियरिंग कॉलेज से भी 34 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया। कर्मचारियों की हाजिरी तो सुबह से ही नहीं लगवाई गई।

दोपहर बाद जब उनके मोबाइल पर 3 माह की तनख्वाह का बैंक से मेसेज आया, तब जाकर कर्मचारियों को पता चला कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। इसके बाद कर्मचारियों को मालूम हुआ कि उन्हें नौकरी से निकालने के लिए उनके घर पर पत्र पोस्ट के माध्यम से भेज दिए गए हैं।
नई लिस्ट पर कराए हस्ताक्षर
यूं तो कर्मचारियों को उसी समय आभास हो चुका था कि जब कॉलेज प्रबंधन ने सभी कर्मियों की एक सूची जारी कर दी थी। जिन कर्मचारियों को कॉलेज में रखा गया है, उस सूची में केवल उन्हीं का नाम था और उन्हीं के हस्ताक्षर कराए गए। बाकी जिन कर्मचारियों को बाहर निकाला गया, न उनका कोई नाम था और न ही हाजिरी के लिए हस्ताक्षर कराए।
8 कर्मचारियों को बचा गए अपने
प्रबंधन ने 42 कर्मचारियों की सूची तैयारी कर रखी थी। निकाले गए कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन से साठगांठ के बाद 8 कर्मचारी बच गए। इसमें कई कर्मचारी किसी अधिकारी के परिचित हैं तो कई कॉलेज प्रबंधन के नजदीकी हैं। कर्मचारी कमेटी के उप प्रधान सज्जन कुमार का कहना है कि प्रबंधन ने उनके साथ अन्याय किया है। बुधवार से कॉलेज में हड़ताल कर दी जाएगी।
वैश्य पब्लिक स्कूल में शांतिपूर्ण चली पढ़ाई
सोमवार को हुए हंगामे के बाद मंगलवार को वैश्य पब्लिक स्कूल में शांतिपूर्ण तरीके से पढ़ाई कराई गई। इस दौरान निकाले गए कर्मचारी स्कूल में नहीं पहुंचे। बाकी स्टाफ और बच्चे निर्धारित समय पर स्कूल में गए। हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से दिन में कई बार पुलिसकर्मियों ने स्कूल के आसपास गश्त भी की।
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प्रशासक बोले, पिछली मैनेजमेंट के कारण निकालने पड़ रहे कर्मचारी
संस्था के स्कूल-कॉलेजों से कर्मचारियों को निकालने का सिलसिला जारी हो गया है। संस्था के प्रशासक और डीसी डी. के. बेहरा ने मंगलवार को प्रेस नोट जारी कर घाटे का तर्क दिया है। डीसी ने बताया कि अप्रैल 2015 में वैश्य पब्लिक स्कूल का मासिक खर्च 24 लाख रुपये प्रतिमाह था, जिसे अब घटाकर 16 लाख महीना कर दिया गया है। फीस की आय 14 लाख रुपये प्रतिमाह है। गत प्रबंधन समिति द्वारा 219 बच्चों की फीस माफ की गई, जिसका वार्षिक नुकसान 24 लाख 40 हजार रुपये है। इसी प्रकार वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज में चालू वर्ष में 2.50 करोड़ रुपये का नुकसान है, जो कि छात्रों की संख्या को देखते हुए फाइनल सेमेस्टर के 400 छात्रों के जाने के बाद 4.50 करोड़ होने का खतरा है। घाटे की भरपाई का कोई ओर माध्यम नहीं था। इसके अलावा तीन डिग्री कालेज में मैचिंग ग्रांट का शेयर जो कि 70 लाख रुपये बनता है वह सोसायटी को देना पड़ता है। वीटीआई की मैचिंग ग्रांट का शेयर 70 लाख रुपये की राशि के अलावा एक करोड़ से ज्यादा लिव इनकैशमेंट की देनदारी बनती है। यह स्थिति पिछली मैनेजमेंट के गलत फैसलों के कारण पैदा हुई है। छंटनी का फैसला संस्था हित में लिया गया है।
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