वैश्य एजुकेशन सोसायटी में संस्था की नींव रखने वाले महापुरुष के नाम पर ही एक करोड़ का घोटाला कर दिया गया।
महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर फर्जी ट्रस्ट बनाकर बड़ा घोटाला किया गया। खुद डीसी और संस्था के मौजूदा प्रशासक डी. के. बेहेरा ने इसकी पुष्टि की है।
डीसी ने जांच कराई तो अहमदाबाद में खोले गए फर्जी ट्रस्ट के खातों में संस्था के खाते से ट्रांजेक्शन की बात सामने आई। सोसायटी के एक आजीवन सदस्य ने एक वर्ष पहले इस मामले में आरटीआई लगाई थी।
जिसमें ट्रस्ट के खाते में लगातार राशि ट्रांसफर होने की बात सामने आई थी। अब मामला पुष्ट होने के बाद डीसी ने एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है।
डेढ़ वर्ष पहले वैश्य एजुकेशन सोसायटी के चुनाव होने से पहले कुछ सदस्यों के सामने महात्मा गांधी और लाला लाजपत राय ट्रस्ट के नाम से खाता होने की बात आई थी।
कॉलेजियम सदस्य विजय गुप्ता ने बताया कि जब तहकीकात की गई तो पता चला कि इन खातों में ट्रांजेक्शन तो होता है, लेकिन इसका रिकॉर्ड सोसायटी के दस्तावेजों में नहीं है।
आजीवन सदस्य अजय गुप्ता ने आरटीआई लगाई। आरटीआई का जवाब आया तो सच्चाई सामने आई । विजय गुप्ता के मुताबिक मनमोहन गोयल से पहले जीवन राम गोयल संस्था के प्रधान थे।
उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद जिला प्रशासन ने सोसायटी की कमान अपने हाथ में ली थी। इसी दौरान ट्रस्ट के बारे में पता चला।
जानकारी मिली कि जीवनराम गोयल के समय में ये दोनों ट्रस्ट बनाई गई थीं। इनका संचालन करने के लिए कुछ लोगों को लगाया गया। लेकिन ट्रस्ट का कोई रिकॉर्ड सोसायटी में है ही नहीं।
विजय गुप्ता, उनके भाई अजय गुप्ता सहित बंसल गुट के कुछ सदस्यों ने इन खातों और ट्रस्टों की जांच करने की मांग उठाई। इसी दौरान सोसायटी के चुनाव की घोषणा हो गई और बंसल गुट हार गया।
मनमोहन गोयल प्रधान और दीपक गोयल महासचिव बने। विजय गुप्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व प्रधान के बेटे सोसायटी के महत्वपूर्ण पद पर बैठे थे, इसलिए इस मामले को दबाने की कोशिश की गई।
मनमोहन गोयल के इस्तीफा देने के बाद गवर्निंग बॉडी भंग हुई तब फिर से जांच की मांग की गई। अब डीसी के हाथों में सोसायटी की कमान आई और उन्होंने जांच कराई।
सूत्रों का कहना है कि अहमदाबाद में खोले गए खातों में राशि ट्रांसफर होते ही वहां से निकल ली जाती थी। यह राशि कौन निकलता था? खाता संचालक की जिम्मेदारी किसे दी गई थी? इसका फिलहाल पता नहीं है। हालांकि आरोप पूर्व प्रधान के कार्यकाल के सदस्यों पर लगाए जा रहे हैं।
इनका कहना है
यह हमारी पुरानी मांग थी। लेकिन पिछली गवर्निंग बॉडी ने इस मामले को दबाने और दोषियों को बचाने की पूरी कोशिश की। अब सब साफ हो गया है। संस्था को बर्बाद करने वालों के चेहरे बेनकाब होने चाहिए।
राजेंद्र बंसल, कॉलेजियम सदस्य वैश्य एजुकेशन सोसायटी।
हमारी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ ही है। यदि हम आरटीआई नहीं लगाते तो यह मामला चलता ही रहता। इन खातों में जो राशि डाली गई वह किस मद की राशि थी यह भी सोसायटी के रिकॉर्ड में नहीं है। हमारी मांग है कि जिन्होंने बेईमानी की उन्हें प्रशासन जेल की हवा खिलाए और उनकी आजीवन सदस्यता खत्म की जाए।
अजय गुप्ता, कॉलेजियम सदस्य वैश्य एजुकेशन सोसायटी।
वर्जन
वैश्य संस्था में फर्जी ट्रस्ट बनाकर लगभग एक करोड़ का घोटाला सामने आया है। सारे खाते मंगवाए, रिकॉर्ड मंगवाया और बैंक से पुरानी स्टेटमेंट मंगवाई गई। सामने आया है कि अहमदाबाद में खुले हुए खातों में पैसा ट्रांसफर किया जा जाता है और वहां निकल लिया जाता है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
डीके बेहेरा, डीसी और प्रशासक, वैश्य एजुकेशन सोसायटी, रोहतक।