पंडित भगवतदयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में नकल से पास कराने के खेल में पूरा गिरोह सक्रिय है। यह एक न होकर अलग-अलग कई गुटों में है। इनके पास कराने तरीके भी अलग हैं। छात्र ऐसे पेन से लिखते थे, जिसका लिखा हुआ बाद में ड्रायर से साफ कर देते थे और सही उत्तर लिखते थे।
कुछ युवा डॉक्टर बनने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। ये उत्तर पुस्तिका में नीला नहीं, अलग तरह का पेन इस्तेमाल करते थे। इससे परीक्षा में उत्तर पुस्तिका पर सवालों के जवाब लिखने के बाद मिटाकर नए सिरे से सही जवाब लिखते थे। इसके लिए इसे पेन से लिखे सवाल पर ड्रायर की गर्म हवा फेंकते थे।
गोपनीय शाखा से उत्तर पुस्तिकाएं बाहर लाते और फिर वापस जमा कराते
परीक्षा पास कराने वाले गिरोह के सदस्य रुपये देने वाले विद्यार्थी को उत्तर पुस्तिकाएं मुहैया कराते थे। ये गोपनीय शाखा से उत्तर पुस्तिकाएं कैसे लाते थे, यह बात गिरोह के सदस्य ही बता सकते हैं। इन उत्तर पुस्तिकाओं पर सभी सही जवाब लिखकर वापस जमा करा देते थे। इससे पिछली परीक्षा में फेल परीक्षार्थी पास हो जाता था।
प्रति पेपर पांच लाख रुपये तक की वसूली करते
छात्रों को नकल से पास कराने के खेल में गिरोह प्रति पेपर करीब पांच लाख रुपये वसूलते थे। यह फिक्स राशि नहीं है। इसमें यदि कोई कम रुपये देने वाला हो तो तीन लाख और विद्यार्थी अच्छे परिवार से हो तो सात लाख रुपये तक वसूलते थे। गिरोह का शिकार बने निजी मेडिकल कॉलेज के एक विद्यार्थी ने बताया कि गिरोह ने फेल कराने की धमकी देकर डराया था। परीक्षा परिणाम आया तो फेल हो गया। परिणाम आते ही उन्होंने संपर्क किया और बोले- पास होना है तो रुपये लगेंगे। पहले पांच लाख मांगे। यह राशि देने में समर्थ रहा तो तीन लाख रुपये में सौदा तय हुआ। इसी तरह और विद्यार्थियों से रुपये लिए जाते हैं।
नकल करते विद्यार्थियों का वीडियो भी मिला
विवि प्रशासन को मिली शिकायत के साथ एक वीडियो भी मिला है, जो कथित रूप से नकल मामले का बताया जा रहा है। इसमें कुछ विद्यार्थी नकल करते साफ नजर आ रहे हैं। इन्हें विवि की जांच कमेटी में शामिल कर सकती है। यही नहीं, इन विद्यार्थियों के साथ विवि का एक कर्मचारी भी वहां साफ नजर आ रहा है।