विद्यार्थियों को डिग्री देने में लापरवाही बरतने वाली यूनिवर्सिटी पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शिकंजा कस दिया है। यूजीसी ने देश भर की यूनिवर्सिटी को पत्र जारी करके चेताया है कि विद्यार्थियों को निर्धारित अवधि के अंदर डिग्री मिल जानी चाहिए। ऐसा नहीं करने वाली यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अक्सर देखने में आ रहा है कि यूनिवर्सिटी की तरफ से विद्यार्थियों को समय पर न डीएमसी मिल रही और न ही डिग्रियां। इसे लेकर यूनिवर्सिटी में हंगामे-प्रदर्शन होते रहते हैं। इसी समस्या पर यूजीसी में कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। यूजीसी ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए देश भर की यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कसा है। यूजीसी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो विद्यार्थी कोर्स पूरा कर लेते हैं उनकी डिग्री पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। डिग्री नहीं मिलने से केवल विद्यार्थियों को ही परेशानी नहीं होती है, बल्कि संस्थान की छवि भी धूमिल होती है। ऐसे मामलों में कोताही नहीं होनी चाहिए, जिन कोर्सों के लिए जो समय अवधि तय है उसी के अनुसार डिग्री मिल जानी चाहिए।
एमडीयू का हाल-बेहाल, साल 2012 के बाद नहीं हुआ दीक्षांत समारोह
डिग्री नहीं देने के मामले में एमडीयू का हाल बेहाल है। नियमानुसार, हर साल यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह होना चाहिए। इसमें टॉपर और पीएचडी समेत अन्य प्रतिभावान विद्यार्थियों को डिग्री बांटी जाती है। एमडीयू में वर्ष 2012 में दीक्षांत समारोह हुआ था। इसके बाद से अभी तक दीक्षांत समारोह की तैयारियां भी नहीं की गई। लॉ, ज्योग्राफी, इंजीनियरिंग और इंग्लिश समेत कई कोर्सों की डिग्रियां लंबे समय से पेंडिंग हैं। कभी प्राइवेट कंपनी न्यासा के साथ हुए विवाद में डिग्री नहीं बन पाती तो कभी स्थानीय स्तर पर विभाग की तरफ से चूक हो रही है। डिग्री मिलना तो दूर की बात है कि कई कोर्सों की डीएमसी तक नहीं मिल पा रही। किसी में ग्रांट टोटल नहीं हुआ तो किसी में त्रुटि ठीक नहीं हो रही। एमडीयू के आंकड़े पर नजर डालें तो हर साल लगभग एक लाख नए विद्यार्थियों का दाखिला होता है, इस तरह प्रतिवर्ष एक लाख विद्यार्थियों को डिग्री मिलनी चाहिए, लेकिन पचास फीसदी को भी समय पर डिग्री नहीं मिल रही।
प्रविजनल के नाम पर हो रही है वसूली
नियमानुसार, यदि किसी विद्यार्थी को डिग्री जल्दी चाहिए तो वह 300 से 500 रुपये निर्धारित फीस जमा कराकर डिग्री या डीएमसी निकलवा सकता है। यूजीसी ने विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए यह नियम लागू किया था, लेकिन अब कुछ यूनिवर्सिटी ने इसे अवैध वसूली का धंधा बना लिया है। यूनिवर्सिटी की कमी के चलते डिग्री या डीएमसी समय पर नहीं मिलती, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है और मजबूरी में उन्हें प्रविजनल डिग्री या डीएमसी लेनी पड़ती है। इसी तरह प्रविजनल रिजल्ट भी वसूली का धंधा बन गया है।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी का हाल
यूनिवर्सिटी के नियमानुसार, परीक्षा के सवा साल बाद विद्यार्थियों को डिग्री मिल जानी चाहिए, लेकिन यहां पर इस नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। यहां पिछले वर्ष की लगभग 4500 डिग्री पेंडिंग हैं। इसमें बीजेएमसी, बीए, बीएससी मेडिकल, नॉन मेडिकल, बीकॉम, एमए और लॉ आदि शामिल हैं।
सोनीपत में यह है स्थिति
सर छोटूराम तकनीकी विश्वविद्यालय मुरथल के परीक्षा नियंत्रक महाबीर कुंडू ने बताया कि सत्र 2011-12 से दीक्षांत समारोह नहीं हो सका। इस कारण वर्ष 2013 में दो साल की डिग्री एक साथ दी गई थी। अब साल 2015-16 की डिग्री नवंबर माह में होने वाले दीक्षांत समारोह में दी जाएगी। उधर, खानपुर महिला विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विमल जोशी के अनुसार, हर साल दीक्षांत समारोह आयोजित कर डिग्री दी जाती है। इस साल में अगस्त में होने वाले दीक्षांत समारोह में डिग्री दी जाएगी।
जीजेयू में 2011 से नहीं हुआ दीक्षांत समारोह
हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में 2011 से दीक्षांत समारोह नहीं हुआ है। हालांकि इसी वर्ष सितंबर में दीक्षांत समारोह होना प्रस्तावित है।
यूनिवर्सिटी में किसी भी कोर्स की डिग्री पेंडिंग नहीं है, जो केस क्लीयर नहीं हुए हैं केवल उन्हीं की डिग्री पेंडिंग है। बाकी सभी कोर्सों की डिग्री समय पर दी जा रही है।
- डॉ. बीएस सिंधु, परीक्षा नियंत्रक एमडीयू