‘डर से सहमी आंखें..., 15 दिनों की खौफनाक दास्तान को बया करने वाली खामोशी..., लेकिन थोड़ी राहत , थोड़ा सुकून इस बात का कि वह उन दरिंदों के चंगुल में नहीं बल्कि अपनों के साथ है।
इसी राहत ने उसे हिम्मत दी और एक धीमा स्वर उसके मुंह से निकला... अंकल उन्होंने सन्नी का एक हाथ काट दिया है... भीख मांगने केलिए, अब वह उससे भीख मंगवाते हैं.. मुझे भी शायद इसीलिए किडनेप करके ले जा रहे थे...। यह सनसनीखेज खुलासा किया है, 15 दिन पहले माता दरवाजा से किडनेप हुए दस वर्ष के बच्चे ने।
केवल यही नहीं इससे भी ज्यादा खौफनाक मामलों की जानकारी इस बच्चे ने पुलिस को दी है। बच्चे का जहां रखा गया, वहीं पर माता दरवाजा से 4 साल पहले लापता हुए सन्नी को भी रखा गया था। बच्चे ने वहां उसे पहचान लिया।
मामला 15 दिन पहले गायब हुए शौरा कोठी निवासी दस वर्षीय चिंटू (बदला हुआ नाम) का है।
उसने बताया कि अपहरणकर्ता उसे पहले भटिंडा ले गए और वहां से उसे हरिद्वार ले जा रहे थे। इसी बीच ट्रेन में बच्चे का एक परिचित मिल गया और चिंटू को ले जा रहे अपहरणकर्ताओं में से तीन को पकड़ लिया गया। आरोप है कि इन लोगों को पकड़ने केबाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। 3 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो बुधवार को पीड़ित गौकर्ण चौकी पहुंच गए और हंगामा किया।
चिंटू ने पहले जीआरपी, फिर गौकर्ण पुलिस और फिर पत्रकारों के सामने खुलासा करते हुए कहा कि चार मई को कुछ लोग उसे माता दरवाजा के पास से उठा ले गए। तालाब के पास उन्होंने एक इंजेक्शन लगाया, जिससे वह बेहोश हो गया था। फिर उसे भटिंडा ले गए। चार मई से 19 मई तक भटिंडा में रखा गया।
चिंटू ने बताया कि यहां करीब 15 और बच्चे थे, जिन्हें अलग-अलग जगह से लाया गया था। इनमें से ही एक सन्नी भी है, जो चार वर्ष पहले माता दरवाजा के पास से गायब हुआ था। लेकिन अब उसका एक हाथ कटा हुआ था। उससे भीख मंगवाई जाती थी, खाने को सिर्फ खिचड़ी देते थे। मारते थे, पीटते थे। ऐसा वह हर बच्चे के साथ करते थे। चिंटू ने बताया कि वे लोग बेहद गंदे हैं, रात को बच्चाें के साथ अप्राकृतिक कृत्य भी करते थे।
चिंटू के अनुसार करीब आठ दस लोग उसे भटिंडा से 19 मई को हरिद्वार ले जा रहे थे। इसी ट्रेन में शौरा कोठी निवासी मोहन और उसका पिता पाले रोहतक आ रहे थे। बच्चे ने ट्रेन में मोहन को देखा तो वह छिपकर पास पहुंच गया और सारी बात बताई। मोहन ने यह बात अपने पिता पाले को बताई।
इसी दौरान अपहरणकर्ता वहां पहुंच गए और चिंटू को उनसे फिर से जबरदस्ती ले गए। पाले और मोहन ने रोहतक फोन कर घटना की सूचना दी। इस पर लगभग दो दर्जन लोग रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। जब ट्रेन रोहतक स्टेशन पर आई तो लोगों ने अपहरणकर्ताओं को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन वे भागने लगे। लोगों ने उनमें से तीन को दबोच लिया। जिसमें दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं। तीनों को लोगों ने जीआरपी को सौंप दिया।
पाले का आरोप है कि जब सारी बात जीआरपी को बताई गई तो उन्होंने बच्चे को ले जाने और तीनों को छोड़ने के लिए कह दिया। जब जीआरपी ने कोई कार्रवाई नही की तो लोग तीनों अपहरणकर्ताओं को गौकर्ण चौकी ले आए। यहां पुलिस ने तीनों को पकड़ तो लिया, लेकिन केस दर्ज नहीं किया। तीन दिन बाद भी जब केस दर्ज नहीं हुआ तो बुधवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और वे गौकर्ण चौकी पहुंच गए। वहां जमकर हंगामा किया और पुलिस पर गंभीर आरोप भी लगाए। बात आला अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक मामला दर्ज नहीं हुआ है।
गौकर्ण चौकी प्रभारी रोशनलाल से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने जानकारी होने से ही मना कर दिया। कहा कि वे दो दिन से चंडीगढ़ में हैं और अभी दो दिन और लगेंगे। इतना कहने के बाद उन्होंने फोन काट दिया। चौकी प्रभारी का कहना है कि वे दो दिन से चंडीगढ़ में हैं, मगर तीनों आरोपियों को तीन दिन पहले ही चौकी में पकड़वा दिया गया था। साफ है कि पुलिस कार्रवाई करने को लेकर कितनी गंभीर है?