लिंगानुपात में सुधार लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई सख्ती ने निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का पसीना छुड़ा रखा है।
पिछले दो साल के आंकड़ों की बात करें तो अधिकारियों की सख्ती देखते हुए जिले के करीब 13 निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों ने स्वयं की जांच मशीन अधिकारियों के हवाले कर दी।
उनका स्पष्ट कहना था कि वे कानूनी पचड़ों में नहीं फंसना चाहता, इसके चलते उनके अन्य कार्य भी प्रभावित होते हैं। इस पर अधिकारियों ने इस मशीनों को सील कर दिया।
कुछ जांच केंद्रों ने तो अपनी मशीन ही सेल कर दी। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देश हैं कि प्रदेश में एक भी बेटी गर्भ में नहीं मरनी चाहिए।
इसके लिए हर जांच केंद्र पर नजर रखी हुई है। जिले भर में 46 अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र हैं और 34 एमटीपी सेंटर हैं। इनकी समय-समय पर जांच की जाती है।
पिछले दो माह की बात करें तो एक बार सभी पर छापामारी की जा चुकी है और आठ जांच केंद्रों पर शक के आधार पर छापामारी की गई।
यहां जांच के दौरान लिपिकीय खामी मिली, इस पर उन्हें चेतावनी दी गई है। इसके अलावा एक विशेष अभियान चलाया गया है कि इसमें अल्ट्रासाउंड संचालक महिलाओं व उनके परिजनों की विडियो रिकार्डिंग करेंगे। इसमें यदि वे लिंग के बारे में पूछते पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई होना निश्चित है।