पंचायत व पुलिस पर जिस केस में आरोप था कि जबरन समझौता करवा दिया, उसी केस में एडीजे आरपी गोयल की अदालत ने मंगलवार को दो आरोपियों को नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न पर दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी संजय व दीपक को 10-10 साल की कैद व 15-15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक मई 2018 में एक व्यक्ति पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में पहुंचा और शिकायत दी कि वह गरीब परिवार से है। उसकी 15 वर्षीय बेटी स्कूल से दोपहर घर पहुंची। आरोपी युवक संजय व दीपक सहित तीन युवक उसकी बेटी का अपहरण करके ले गए और उसके साथ गलत कार्य किया। उसने नजदीकी पुलिस थाने में रिपोर्ट दी, लेकिन पंचायत व पुलिस ने जबरदस्ती समझौता करवा दिया। इसके बावजूद आरोपी युवक न केवल उन्हें जान से मारने की धमकी देते हैं, बल्कि उसकी लड़की को तंग करते हैं।
एसपी के आदेश पर पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल कर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 365, 506 व 34 आईपीसी और 6 पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। पड़ताल के बाद आरोपी संजय व दीपक को गिरफ्तार कर लिया। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। केस में अपहरण की जगह माना गया कि आरोपी नाबालिग को बहला-फुसला कर ले गए थे। कोर्ट ने दोनों को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 363 के तहत 3 साल की कैद व 3 हजार रुपये जुर्माना, 506 के तहत 2 साल की कैद व 2 हजार रुपये जुर्माना और 6 पोस्को एक्ट के तहत 10 साल की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।