रोहतक। माॅडल टाउन से स्कूल गए दो सगे भाई 10 वर्षीय सत्यम व 13 वर्षीय शिवम रास्ता भूलकर आईएमटी चले गए। रात को रास्ता नहीं मिला तो सुबह पुराने बस स्टैंड पर पहुंचे। किसी परिचित ने कॉल करके सूचना दी, तब जाकर राहत की सांस ली।
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के गांव अचल चकिया निवासी राजकुमार ने बताया कि वह परिवार सहित माॅडल टाउन में चार खंभा के पास रहता है। वह सब्जी व फल की रेहड़ी लगाता है। उसके तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा 13 साल का शिवम, दूसरा 10 साल का सत्यम व तीसरा हिमांशु है। तीनों निजी स्कूल में पढ़ने गए थे। स्कूल में पीटीएम थी। बच्चों का परीक्षा परिणाम सामान्य था। दोपहर करीब डेढ़ बजे शिवम व सत्यम अपनी मर्जी से चले गए।
शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे परिचित ने सूचना दी कि उसके बेटों को पुराने बस स्टैंड के पास देखा गया है। वह पुराने बस स्टैंड पर पहुंचे, जहां दोनों मिल गए। पूछने पर बताया कि वे घूमते हुए पहले तो दिल्ली रोड पर आईएमटी में चले गए। अंधेरा होने के कारण रास्ता भटक गए। रात को एक होटल के पास झाड़ियों में सो गए। सुबह एक ऑटो वाले ने पुराने बस स्टैंड पर छोड़ दिया।