शीला बाईपास रोड स्थित टीवीएस एजेंसी में युवकों ने अपने ही एक साथी मैकेनिक की हत्या कर दी। पहले पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया और कुछ आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मृतक के परिजन बिफर गए और शुक्रवार दोपहर को सिविल लाइन थाना घेर लिया।
पोस्टमार्टम कराने से इंकार करते हुए थाने में हंगामा कर दिया। बवाल होता देख पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के मामले को हत्या के मामले में बदल दिया और हत्या समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। हत्या एयर गन लेने के मामूली विवाद को लेकर की गई। सारी वारदात एजेंसी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। परिजन फुटेज देखकर ही भड़के और हत्या का केस दर्ज करने पर अड़ गए।
मामूली बात पर ही कर दी हत्या : सुनारिया चौक स्थित अमृत कालोनी निवासी दीपक (26 वर्ष) शीला बाईपास रोड स्थित एस. के. जैन टीवीएस एजेंसी में 8 साल से बतौर मैकेनिक काम करता था। बृहस्पतिवार दोपहर दीपक एजेंसी में आया और वहां सफाई के लिए एयर गन उठाकर काम करने लगा। इसी बात पर एक साथी भड़क गया और कहा कि उसकी एयर गन को उसने बिना पूछे कैसे उठा लिया।
इस बात को लेकर विवाद बढ़ गया। वहां काम कर रहे अन्य लोगों ने दीपक पर हमला कर दिया। इस दौरान एक आरोपी ने एयर गन से हमला किया। दीपक घायल होकर वहीं गिर गया। मौके पर भीड़ जुट गई और एजेंसी मैनेजर और अन्य दीपक को आनन फानन में पीजीआई लेकर पहुंचे। उपचार के दौरान घायल ने दम तोड़ दिया।
पीजीआई पहुंची थाना सिविल लाइन पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। परिजनों ने पुलिस और डाक्टरों से पूछा तो मामला संदेहास्पद नजर आया। पुलिस से जांच की मांग की। पुलिस ने एजेंसी पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगाली। फुटेज देखने से परिजनों का शक यकीन में बदल गया और हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की।
पुलिस की लापरवाही पर भड़के परिजन : शुक्रवार सुबह पुलिस के बुलावे पर परिजन थाने पहुंचे। पता चला कि पुलिस गैर इरादतन हत्या की धारा 304 के तहत मामला दर्ज कर रही है। इतना ही नहीं एक आरोपी को बाहर बैठा रखा है। गुस्साए परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से हत्या की धारा 302 के तहत मामला दर्ज करने की बात कही। लेकिन पुलिस इस बात के लिए तैयार नहीं हुई। पुलिसकर्मी अड़ गए कि हत्या का मामला नहीं है। समझाने लगे कि हत्या के मामले में कोई गवाह नहीं बन पाएगा।
पुलिस पर ये लगाए आरोप : थाने में पहुंचे मृतक दीपक के पिता बलबीर सिंह, बड़े भाई रामनिवास, विनोद कुमार, मनोज कुमार, नवीन, संदीप, काला, सुखबीर, अशोक कुमार, मुकेश, बारू, रामप्रसाद, जयभगवान और सतनारायण ने बताया कि पुलिस मामले में जानबूझ कर ढीला रवैया अपना रही है। पुलिस एजेंसी संचालक के साथ मिलीभगत कर मामला दबाना चाह रही है।
परिजनों का कहना है कि दीपक की मौत बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे ही हो गई थी, लेकिन उसके बाद भी उन्हें जानकारी दोपहर बाद दी गई। एजेंसी संचालक विवेक जैन, मैकेनिक हेड राजेश, राजू व हेल्पर साबिर पर दीपक की हत्या करने और साक्ष्य छुपाने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।
दबाव बढ़ा तो पुलिस ने किया हत्या का मामला दर्ज : हंगामा बढ़ते देख थाना सिविल लाइन कर्मियों ने अधिकारियों को दी। डीएसपी अनिल कुमार पहुंचे। परिजन सीधे रूप से हत्या का मामला दर्ज करने की जिद पर अड़े रहे और मामला दर्ज न किए जाने तक पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। दबाव बढ़ता देख पुलिस के पसीने छूट गए। इस पर डीएसपी ने पुलिसकर्मियों को हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए।
परिवार में अकेला ही था कमाने वाला : परिजनों ने बताया कि दीपक के पिता बलबीर बीमार रहते हैं। बड़ा भाई रामनिवास और भाभी भी विकलांग हैं। ऐसे में घर में केवल वही एक लड़का था जो सारा खर्च चलाता था। उसके भाई के दो बच्चे हैं और वह भी अपने पीछे दो बच्चों को छोड़ गया है। उसकी 2 साल की बेटी है और बेटा 4 साल का है।
डीएसपी अनिल कुमार ने कहा, परिजनों की मांग पर हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल मामले में चार आरोपी बनाए गए हैं, जिनमें विवेक जैन, राजेश, राजू और साबिर का नाम शामिल है। तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है। मामले में जांच की जा रही है।