फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेरोजगारी के काल में टीटीआई ने दिखाई रोजगार की राह

विज्ञापन
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
विज्ञापन

हिसार। लॉकडाउन के दौरान चले बेरोजगारी के दौर में सिरसा रोड स्थित उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (टीटीआई) ने रोजगार की राह दिखाई। 250 प्रवासी मजदूरों को प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाया गया। उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा केंद्र है, जहां किसानों को ट्रैक्टर व अन्य कृषि संयंत्र चलाने, उनकी मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण मुफ्त में दिया जाता है। तीन दिन से 6 सप्ताह के होने वाले विभिन्न कोर्सों के तहत किसानों को यहां प्रति सप्ताह एक हजार रुपये का वजीफा भी मिलता है। लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन अब सवा साल बाद जुलाई माह से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होगी। शुरुआत में 50 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश जैन ने बताया कि यहां करीब 156 देशों के 75 हजार से अधिक किसान व अन्य लोग प्रशिक्षण ले चुके हैं। ट्रेनिंग लेने वालों में रवांडा, इथोपिया, केन्या, सूडान, नाइजीरिया, तंजानिया, मोरेक्को, युगांडा, मेडागास्कर, अल्जीरिया, मॉरीशस, भूटान, नेपाल, इराक, अफगानिस्तान आदि देशों के लोग शामिल हैं। करीब 5000 लोगों को अब तक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। किसानों को इस समय के दौरान आने-जाने का किराया भी संस्थान की तरफ से दिया जा रहा है। भारत सरकार ने किसानों के परीक्षण व कृषि मशीनरी की टेस्टिंग का पहला केंद्र 1956 में मध्यप्रदेश के बुदनी में खोला था। इसके बाद बढ़ती जरूरत को देखते हुए 1963 में हरियाणा के हिसार में देश का दूसरा केंद्र खोला गया। इसका उद्देश्य कृषि मशीनरी क्षेत्र में अभियांत्रिकी के लिए सभी वर्गों, किसान, डिप्लोमा होल्डर, इंजीनियर, कंपनी के लोग, डिफेंस, विदेशी को कृषि मशीनरी क्षेत्र में प्रशिक्षित करना था। निदेशक ने बताया कि संस्थान अपने कुछ पाठ्यक्रम एग्रीकल्चरल स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ मिलकर चला रहा है। इसमें ट्रैक्टर ऑपरेटर और ट्रैक्टर मैकेनिक जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। पिछले वर्ष कोविड काल में लगभग 250 प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कोर्स चलाया गया, ताकि वे अपने स्थानों पर जाकर भी अपना काम कर सकें।
विज्ञापन

यह कार्य करता है संस्थान
- गांव-गांव में उन्नत कृषि मशीनरी का प्रचार-प्रसार
- ग्राम पंचायत के अनुरोध पर ग्रामीणों के लिए ट्रेनिंग
- कृषक महिलाओं के लिए कृषि यंत्रों की विशेष ट्रेनिंग
- पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा-पंजाब में मशीनी प्रदर्शन
- किसानों को 3 दिन से 6 सप्ताह तक का मशीनरी प्रशिक्षण
- कस्मर हायरिंग सेंटर स्थापित करवाना और उनके बारे में प्रशिक्षण
- डिप्लोमा व स्नातक इंजीनियरिंग के लिए प्रशिक्षुओं को एक से दो वर्ष का अप्रेंटिशिप प्रशिक्षण देना
इन मशीनों का मिलता है प्रशिक्षण
- ट्रैक्टर एवं कृषि मशीनरी का परिचालन, मरम्मत, व रखरखाव
- कंबाइन हार्वेस्टर को चलाना व मेंटेनेंस करना
- सिंचाई पंप, स्प्रीकूलर, ड्रिप सिंचाई प्रशिक्षण
- पौध संरक्षण यंत्रों जैसे स्पेयर का प्रशिक्षण
- उन्नत कृषि यंत्रों पर प्रशिक्षण
- पराली प्रबंधन मशीनरी का प्रशिक्षण
- कटाई उपरांत प्रयोग होने वाली मशीनरी का प्रशिक्षण
- सूखाग्रस्त क्षेत्र के लिए उपयुक्त कृषि यंत्रों का प्रशिक्षण
बेरोजगारों को बनाया जाता है मिस्त्री
यह संस्थान किसानों के साथ-साथ बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए मिस्त्री बनने का कोर्स भी चलाता है। यहां से युवा ट्रैक्टर, कृषि यंत्र, डीजल इंजन, बैटरी का काम सीखकर स्वरोजगार स्थापित कर सकता है। इस कोर्स के लिए केवल 100 से 300 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस लगती है।
विज्ञापन

बयान ----
कोरोना काल में किसानों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हमारा फोकस ट्रेनिंग और टेस्टिंग दोनों पर होता है। जिन किसानों को प्रशिक्षण लेना है वे कभी भी संस्थान में आकर जानकारी ले सकते हैं। अब एचएयू के एग्री बिजनेस इंक्यूबेशन सेंटर के साथ मिलकर कृषि मशीनरी क्षेत्र के इनोवेटर्स को प्रोत्साहन देने और उन्हें सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए एचएयू से एमओयू किया जाएगा।
- डॉ. मुकेश जैन, निदेशक, उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण केंद्र, हिसार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें