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Rohtak News: एसआईआर में मुसीबत...मतदाता विदेश में, बीएलओ खटखटा रहे दरवाजा

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04-रोहतक के सेक्टर-14 में बुजुर्ग मतदाता को समझाने का प्रयास करते बीएलओ व बीएलए। संवाद
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रोहतक। मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के लिए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) फॉर्म लेकर घर-घर दस्तक दे रहे हैं लेकिन खटखटाने पर भी दरवाजा नहीं खोल रहे। आस-पड़ोस में पूछताछ की तो पता चला कि कोई विदेश में है तो कुछ मतदाता बंगलूरू, नोएडा समेत दूसरे राज्यों में गए हुए हैं। ऐसे में बीएलओ को बगैर एसआईआर के ही लौटना पड़ रहा है।
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सेक्टर-14 में एसआईआर के दौरान बीएलओ व बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) के साथ संवाददाता ने वीरवार को लाइव कवरेज की। दोपहर 12:30 से 1:30 बजे तक देखा कि हर गली में एक केस ऐसा जरूर मिला कि घर पर ताला लगा है या फिर सिर्फ बूढ़े माता-पिता रह रहे हैं।
कई घरों से जवाब मिला कि बेटा विदेश में है। अन्य घरों में पूछने पर बताया कि बच्चे नोएडा में रहते हैं। वहीं एक दूसरे घर से जवाब मिला कि बेटा-बहू बंगलूरू रहते हैं।
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कई घरों में तो परिवार का कोई सदस्य ही नहीं मिला और पड़ोसी भी कुछ जानकारी नहीं दे सके। ऐसे घरों में फॉर्म देने के लिए बीएलओ को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
कुछ घरों में परिजनों ने मतदाताओं के फॉर्म ले लिए और वादा किया कि फॉर्म देंगे। कुछ ने साफ कह दिया कि जब बच्चे घर आ जाएंगे, तब जानकारी लेकर भरवा देंगे। संवाद
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बुजुर्गों को समझाने में आ रही सबसे बड़ी दिक्कत
बीएलओ की दूसरी सबसे बड़ी समस्या बुजुर्गों को अच्छे से न समझा पाने की रही। 5 से 10 मिनट में दरवाजा खोलने के लिए मतदाता गेट पर पहुंचते हैं। इसके बाद हर घर में फॉर्म को लेकर वही सवाल दोहराया जाता कि किस कॉलम में क्या भरा जाएगा, हस्ताक्षर कहां होगा, ऑनलाइन कैसे होगा, फोटो कहां लगेगा, कहां जमा करवाना है। बीएलओ आशीष बताते हैं कि दिन में 200 से अधिक घरों में एसआईआर का लक्ष्य रखते हैं लेकिन मतदाताओं की मौजूदगी न होने व अधिक समय लगने से 90-100 घर ही कवर कर पा रहे हैं।

सेक्टर-14 के घरों में य रही स्थिति
दोपहर 12:36 बजे : महिला बोली, घर के मुखिया दुकान पर हैं। समझाने के बाद फॉर्म लिया।
12:44 बजे : मकान पर कोई नहीं मिला। पड़ोसी बोले-सदस्य बंगलूरू रहते हैं, कभी-कभार आते हैं।
12:45 बजे : अगले मकान में बुजुर्ग मतदाताओं को समझाना पड़ा, बच्चे जर्मनी गए हुए थे।
12:54 बजे : बीच के घरों के मतदाता न होने से अगले मकानों में जाना पड़ा।
12:55 बजे : दो से तीन बार डोर बेल बजाने के बाद ही घर से बाहर निकले सदस्य।
01:02 बजे : मकान में बुजुर्ग मतदाता को पूरी प्रक्रिया बताने में समय लगा।
01:15 बजे : मकान में कोई नहीं मिला, अगले मकान की ओर बढ़ी टीम।
01:17 बजे : दो मकानों में बुजुर्ग मतदाता को समझाया और फॉर्म दिया।
01:30 बजे : बीएलओ व टीम को मकान नंबर तीन में तीसरा बार जाना पड़ा फिर भी खाली हाथ।

वर्जन
जब बीएलओ घर पर आए तो मतदाता पूर्ण सहयोग करें। मांगी गई जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करवाएं। जिन नागरिकों को किसी प्रकार की जानकारी या सहायता की आवश्यकता हो, वे संबंधित बीएलओ, निर्वाचन कार्यालय अथवा हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।
- सचिन गुप्ता, डीसी
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फोटो : 08
हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या लोगों का घर न मिलना है। बार-बार घर में पहुंचना पड़ रहा है। दूसरी समस्या है कि एक ही बात हर घर में समझानी पड़ रही है। फॉर्म भरने की जानकारी सबको मिल जाए तो काम आसान हो जाएगा।
- प्रदीप, बीएलए-2, सेक्टर-14
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फोटो : 09
वर्ष 2002 से पहले की मतदाता सूची से जानकारी हासिल करने के लिए मतदाताओं के सामने परेशानी आ रही है। विवाहित महिलाओं को अपने मायके में माता-पिता के मतदाता और बूथ संख्या की भी जानकारी देनी है।
- उमेश शर्मा, सेक्टर-14 निवासी

04-रोहतक के सेक्टर-14 में बुजुर्ग मतदाता को समझाने का प्रयास करते बीएलओ व बीएलए। संवाद

04-रोहतक के सेक्टर-14 में बुजुर्ग मतदाता को समझाने का प्रयास करते बीएलओ व बीएलए। संवाद

04-रोहतक के सेक्टर-14 में बुजुर्ग मतदाता को समझाने का प्रयास करते बीएलओ व बीएलए। संवाद

04-रोहतक के सेक्टर-14 में बुजुर्ग मतदाता को समझाने का प्रयास करते बीएलओ व बीएलए। संवाद

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