फोटो: 25सीटीके26-अमर उजाला कार्यशाला में प्रतिभागियों को संबोधित करती प्रो. दिव्या मल्हान। अमर
रोहतक। घर हो या ऑफिस, महिलाएं काम को कला की तरह करती हैं। उसे संवारती हैं। इसी कारण वे हमेशा केंद्र में रहती हैं। छोटी-छोटी चीजों पर फोकस करती हैं और बच्चों सहित परिवार को भी जोड़ती हैं। उनकी इसी कला के कारण काम बेहतर होते चले जाते हैं। आईएमटी स्थित उजाला कार्यालय में मंगलवार को हुई कार्यशाला में एमडीयू के इमसाॅर की प्रो. दिव्या मल्हान ने उक्त बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि कई गृहिणियों को लगता है कि वे घर पर रहती हैं और बाहर काम नहीं करतीं तो उनकी उपयोगिता घर में नहीं गिनी जाती। ऐसा सोचना गलत है। सबसे पहले वो अपने आपको गृहिणी नहीं होम मेकर मानें। वो परिवार का ऐसा फ्रेम हैं, जहां तस्वीर की सुंदरता और रंग वो खुद ही तय करती हैं। ऐसी महिलाएंं हमेशा परिवार के केंद्र में रहती हैं। छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान देती हैं। यह सबसे बड़ा प्रबंधन होता है। उन्हें अपने पर गर्व करना चाहिए। बच्चों और अन्य परिजनों को भी सकारात्मक तरीके से सिखाना चाहिए कि वे आगे बढ़कर पूछें कि मम्मी, आपको क्या पसंद है। इससे परिवार में खुशियां साझा होती हैं। महिलाओं को चाहिए कि अपनी व्यस्तता के बीच आधा घंटा अपने लिए समय निकालें, जिसे आजकल मी टाइम कहा जाता है। इस समय का उपयोग वे अपने लिए करें, उन्हें जो पसंद हो, वो करें। कुछ न सूझे तो कमरे में शांत बैठें। ध्यान रहे मी टाइम का मतलब मोबाइल से दोस्ती नहीं है। दोस्ती अपने आप से है। महिलाएं मानसिक रूप से सशक्त होंगी तो परिवार समृद्ध होंगे।