सुनारिया खुर्द के ट्रांसपोर्टर संत कुमार के आत्महत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को आरोपी हिसार के मदनहेड़ी निवासी संजय पूनिया व जींद के जेजेवंती निवासी जसवंत उर्फ जस्सू को सुबूतों के अभाव में क्लीनचिट दे दी। पुलिस अदालत के अंदर यह साबित नहीं कर सकी कि जो कथित सुसाइड नोट मृतक की तरफ से लिखा गया था, उसके अंदर तथ्य उसने ही लिखे हैं।
मामले के अनुसार महिला पुष्पा देवी ने शिकायत दी थी कि उसका पति संत कुमार ट्रांसपोर्टर का काम करता था। पति की एक बुआ हिसार के मदनहेड़ी तो दूसरी जींद जिले के गांव जेजेवंती में शादीशुदा थी। हिसार से पति की बुआ के लड़के संजय पूनिया ने संत कुमार से 32 लाख रुपये व जींद निवासी जसवंत उर्फ जस्सू ने आठ लाख रुपये उधार दिए थे। बाद में संजय व जस्सू ने पैसे नहीं लौटाए। इससे उसके पति तनाव में रहने लगे। इसी के चलते मार्च 2016 में उसके पति ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। उनको घर पर एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें लिखा था कि वह संजय व जसवंत द्वारा पैसे न देने से परेशान होकर जान दे रहा है। पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया था।
अदालत में पुलिस की तरफ से एक कथित सुसाइड नोट सुबूत के तौर पर दाखिल किया गया था। उसके ऊपर हस्ताक्षर तो जांच में संत कुमार के मिले, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि अंदर लिखे तथ्य भी संत कुमार ने लिखे हैं। दूसरा, शिकायतकर्ता ने कहा था कि उन्होंने शाम पांच बजे देखा कि संत कुमार के मुंह से झाग आ रहे थे। जबकि जींद के एक डॉक्टर ने गवाही दी कि दोपहर संत कुमार को उसके अस्पताल में दाखिल कराया गया था। इसका रिकार्ड भी मिला। इस तरह अदालत में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके।
- वीरेंद्र देशवाल, वकील बचाव पक्ष