जीवन की सार्थकता स्वयं से हटकर दूसरों के लिए सोचना भी है। यह संदेश अगर फलों से लदे वृक्ष और फूलों से लटकती डालियां दे सकती हैं तो फिर ये क्यूं नहीं...। बच्चों की सलामती के लिए दुआएं देने में सबसे आगे रहने वाले किन्नर समाज सेवा में किसी से भी पीछे नहीं हैं। जहां ये उन अनाथ बच्चों का सहारा बन रहे हैं जिन्हें किसी कारणवश मां-बाप का प्यार नहीं मिला।
वहीं, उन जरूरतमंद बेटियों का कन्यादान कर रहे हैं, जिनके मां-बाप गरीबी की वजह से अपनी लड़कियों की अच्छे घर में शादी करने के सिर्फ सपने देखते रहते हैं। उन्हीं मां-बाप और बेटियों के सपनों को साकार करने में लगा है, किन्नर समाज। इन्हें अपने कार्यों की प्रसिद्धि नहीं चाहिए, बल्कि गरीब और जरूरतमंदों के चेहरे पर खुशियां चाहिए। सच्ची समाजसेवा इसी का नाम है।
गांधी नगर स्थित मातुराम कम्यूनिटी सेंटर में रविवार से शुरू हुए नौ दिवसीय अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन का आगाज खिचड़ी रस्म से हुआ। इसमें देश और विदेश से पहुंचे करीब 1200 प्रतिनिधियों ने 95 वर्षीय दिवंगत लीलो प्रधान को समर्पित भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। वहीं, रोहतक के गद्दीनशीन प्रधान बाबू राम ने बताया कि सम्मेलन के पहले दिन विदेशी सामान की प्रदर्शनी लगाई है। सोमवार को कुम्हार के घर चाक पूजा की रस्म से बाकी गतिविधियां शुरू होंगी। कार्यक्रम के दौरान उनकी बहन मीना और पूर्व प्रधान लीलो की बहन नाजिम भात भरने की रस्म पूरी करेंगी।
कंट्रोल रूम से रखी जा रही नजर
अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन की हर गतिविधि पर कंट्रोल रूम से नजर रखी जा रही है। सेंटर में जिन जगहों पर विशेष कार्यक्रम होने हैं, वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यहां पूरे देश और विदेश से भी मेहमान आए हैं, किसी को भी कोई दिक्कत न आए। इसलिए यह इंतजाम किया गया है।
सालभर पहले कराई शादी
सालभर पहले बेटी सुनीता की सभी रस्मों से शादी कराई है। मेरी दादी नाजिम हाजी ने सुनीता को पाला, उसे पढ़ाया और पूरी परवरिश की। इसे 12वीं तक पढ़ाया और अच्छा घर देखकर हाथ भी पीले कर दिए। इस बेटी के पैदा होने से पहले ही पिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई और मां उसे जन्म देने के डेढ़ माह बाद चल बसी।
- बनैनी, मुजफ्फरनगर।
गरीबों के घर बनाने में की मदद
मैं किन्नर कम्यूनिटी के अधिकारों के लिए सक्षम ट्रस्ट चला रही हूं। इसकी जनरल सेक्रेट्री हूं और पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक भी कर रही हूं। हमें अपने अधिकारों के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है, जिसके लिए मैं काम कर रही हूं। दादी नीलम महंत के साथ मिलकर करीब 40 जरूरतमंद बेटियों की शादी कराई है। 111 गरीब लोगों के घर बनाने में भी मदद की है।
- सिमरन प्रीत, चंडीगढ़।
हर साल नौ बेटियों की कराती हूं शादी
समाज सेवा तो बहुत करते हैं, लेकिन ढिंढोरा पीटकर नहीं। पिछले साल नेपाल में आए भूकंप में पीड़ितों के लिए चंदा इकट्ठा करके दिया है। हर साल रामलीला में नौ जरूरतमंद बेटियों की सभी रस्मों के साथ शादी कराती हूं और दान भी देती हूं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए कक्षा कमरे भी बनवाती हूं। अनाथ आश्रम और वृद्धा आश्रम में रहने वाले लोगों की मदद भी करती हूं।
- संजना, चंडीगढ़।
तीन साल पहले बेटी ली गोद
मैंने तीन साल पहले एक बेटी गोद ली है, तब वह सिर्फ छह महीने की थी। मैंने उस मुस्लिम परिवार से बेटी को गोद लिया है, जहां पहले से ही चार-पांच बेटियां हैं। वह परिवार बेटियों को पालने में सक्षम नहीं है, इसलिए हर माह पांच हजार रुपये खर्च भी देती हूं। लोगों की सेवा करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। अपनी बेटी के नाम पर एक प्लॉट भी खरीदा है, ताकि भविष्य में उसे किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
- पिंकी शर्मा, अलीगढ़।
अनाथ बच्चों की करती हूं परवरिश
जिन अनाथ बच्चों का कोई नहीं होता है, उनकी मैं परवरिश करती हूं। उन्हें शिक्षा भी दिलाती हूं, ताकि पढ़ लिखकर वे समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। ऐसे जरूरतमंद परिवारों को ढूंढती हूं, जिनके मां-बाप धन की कमी वजह से उनकी शादी नहीं कर पाते हैं। जो बेटियां पढ़ने की इच्छुक होती हैं, उनकी पढ़ाई में मदद भी करती हूं। समाज से ही लेना है और इन्हीं को देना ही मुख्य काम है।
- पायल, करनाल।
मंदिर और रामलीला कमेटियों में देेते हैं दान
रोहतक में बच्चों की सलामती और अमन-चैन की दुआएं मांगने के लिए एकत्रित हुए हैं। मंदिरों के साथ रामलीला कमेटियों में भी दान करती हूं। गरीब और बेसहारा बच्चों की परवरिश करते हैं, उन्हें पढ़ा लिखाकर काबिल बनाते हैं। परमात्मा हमेशा कहता है कि गरीबों की सेवा करोगे तो मुझे अपने करीब पाओगे। इसलिए हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार रहती हूं।
- हिना, दिल्ली।