रोहतक। शहर में ट्रैफिक लाइट व्यवस्था पटरी पर नहीं चढ़ पा रही है। लाइट को संभालने के लिए विभाग बदल गया है, लेकिन हालात पहले जैसे ही हैं। कहीं बत्ती गुल रहती है तो कहीं पुलिसकर्मी नदारद हैं। ऐसे में मनमर्जी से वाहन चालक जान जोखिम में डालकर लाइट क्रॉस करते हैं। डीएसपी ट्रैफिक का कहना है कि अचानक ट्रैफिक की संख्या बढ़ने से दिक्कत आती है। ऑनलाइन चालान की संख्या बढ़ाई जाएगी।
शहर समय के साथ लगातार बढ़ रही है। 2011 में जहां रोहतक सिटी की जनसंख्या पौने चार लाख थी, वहीं 2017 में बढ़कर 5 लाख 12 हजार हो गई। अब अनुमान है कि जनसंख्या 6 लाख के करीब पहुंच गई है। जनसंख्या बढ़ने के साथ वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। अंदाजा है कि हर रोज 50 हजार से ज्यादा वाहन शहर की सड़कों से गुजरते हैं। सोमवार को संख्या 60 हजार तक पहुंच जाती है। इसके अलावा सुबह स्कूल व सरकारी कार्यालयों के समय 9 से 11 बजे व दोपहर 2 से 3 बजे के बीच में जाम की स्थिति बन जाती है। ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए शहर में 11 जगह ट्रैफिक लाइट लगाई गई हैं। नियमों के तहत ट्रैफिक लाइट देना नगर निगम का कार्य है, जबकि नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी पुलिस की है।
बत्ती गुल तो कहीं ट्रैफिक पुलिसकर्मी नदारद
शहर के अंदर ट्रैफिक लाइट की व्यवस्था पटरी पर नहीं है। चौक व चौराहों पर कहीं ट्रैफिक लाइट खराब पड़ी है। जबकि कहीं पुलिसकर्मी दिखाई नहीं देते। एक दिन पहले सोनीपत स्टैंड पर ट्रैफिक सिग्नल बंद पड़े थे, जबकि पावर हाउस चौक पर पुसिलकर्मी वाहनों को नियंत्रित नहीं कर पा रहा था। अशोक चौक का भी यही हाल रहता है।
हर रोज कट रहे ऑनलाइन चालान, फिर भी नहीं मान रहे वाहन चालक
नगर निगम ने पुलिस के साथ मिलकर शहर के चौक व चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं, जिसका कंट्रोल रूम पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बनाया हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक हर रोज रेड लाइट जंप करने पर 20 के करीब वाहन चालकों के चालान काटकर डाक के माध्यम से घर भेजे जा रहे हैं। इसके बावजूद वाहन चालक नियम तोड़ रहे हैं।
वर्जन-
पहले ट्रैफिक लाइट के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की थी, जो अब पुलिस के पास है। इसके बावजूद ट्रैफिक लाइट व्यवस्था नहीं सुधरी है। पुलिस के आला अधिकारियों से बात करके व्यवस्था को सुधारने की मांग करेंगे।
- मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
कई बार बारिश के चलते ट्रैफिक सिग्नल काम करना बंद कर देते हैं। जबकि पावर हाउस चौक पर कॉलेज की छुट्टी के समय ट्रैफिक की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में बत्ती बंद करके पुलिसकर्मी खुद वाहन नियंत्रित करते हैं। लालबत्ती जंप करने वालों के चालान की संख्या बढ़ाएगी। साथ ही लोगों से आग्रह है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें, नहीं तो पुलिस सख्ती से चालान काटेगी। हर बत्ती पर एक पुलिसकर्मी व तीन होमगार्ड के जवान तैनात रहते हैं।
- डॉक्टर रविंद्र, डीएसपी मुख्यालय