कोरोना संक्रमणकाल और लॉकडाउन ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। महामारी के कारण कारोबारी हाथ पर हाथ धरे बैठने को विवश हैं। मजदूर हैं न ग्राहक। ऐसे में कारोबार कैसे चले। यह दर्द है रोहतक के पत्थर व्यापारियों का। कोरोना महामारी व लॉकडाउन के कारण काम नहीं होने से आहत व्यापारियों से बात की तो उनका दर्द कुछ यूं सामने आया।
दरअसल, महामारी ने सब कुछ जाम करके रख दिया है। काम-काज ठप है। बाजार से रौनक गायब है। पत्थर बाजार भी पत्थर की तरह सुनसान है। यहां राजस्थान से आने वाला पत्थर आ रहा है न गुजरात की टाइलें। मजदूरों के नहीं होने से राजस्थान से माल सप्लाई नहीं हो रहा है। यही हाल गुजरात का है। यहां की फैक्टरियां बंद पड़ी हैं। इस कारण नया माल तैयार नहीं हो रहा है। फैक्टरियों व दुकानों के स्टाक में रखा माल ही फिलहाल ग्राहकों को मुहैया कराया जा रहा है।
कोरोना केसों ने बाजार को ठप कर दिया है। महामारी के कारण मजदूर घर चले गए हैं। कारीगर भी नहीं हैं। इस स्थिति में पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर व प्रशासन आभार के पात्र हैं। इनके सहयोग के कारण ही बाजार चल रहा है।
- राजू भुटानी, अध्यक्ष, टाइल्स, मार्बल ऐंड ट्रेडर्स एसोसिएशन।
पत्थर ज्यादातर राजस्थान से आता है। टाइलें गुजरात से आती हैं। महामारी के कारण कारीगर अपने घर चले गए हैं। इस कारण काम काम बंद है। जरूरत के कारण कुछ लोग ही काम करा रहे हैं। इससे थोड़ी आवाजाही बनी हुई है।
- निटू, महासचिव, टाइल्स, मार्बल ऐंड ट्रेडर्स एसोसिएशन।
कोरोना के कारण काम तो खत्म ही हो गया है। राजस्थान से पत्थर आता है। वहां भी लेबर नहीं होने के कारण माल नहीं आ रहा है। संक्रमण के कारण बाजार में पत्थरों की मांग भी नहीं है। संक्रमण से बचने के लिए चेक से पेमेंट करा रहे हैं।
- सुनील, पत्थर व्यापारी।
महामारी काल में खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है। मजदूर व कारिगरों की कमी खल रही है। नया काम शुरू होने पर ही ग्राहक की मांग से बाजार में तेजी आएगी। संक्रमण से बचने के लिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- मोहनलाल, पत्थर व्यापारी।