रोहतक। सरकार की लाज बचाने को आखिर जिला प्रशासन ने प्रतिष्ठा का सवाल बनी जिले की सबसे प्रमुख रोहतक मंडी में भी गेहूं की खरीद शुरू करवा दी। जुगाड़ के इंतजामों के साथ मंगलवार को इतनी बड़ी मंडी में सिर्फ 70 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। दूसरे दिन जिले की सभी मंडियों में 1036 टन गेहूं की खरीद की गई।
मैनुअल खरीद की मांग को लेकर बीस अप्रैल से चल रही आढ़तियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। हड़ताल के चलते सोमवार को रोहतक मंडी में गेहूं का एक दाना नहीं खरीदा गया था। सरकार किसी भी कीमत पर आढ़तियों की दबाव की रणनीति में आने को तैयार नहीं है। ऐसे में रोहतक मंडी में गेहूं की खरीद शुरू करवाना प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। दोपहर बारह बजे तक आढ़ती नहीं माने तो प्रशासन ने हैफेड की सोसायटी के जरिये खरीद करवाने का फैसला किया। आनन-फानन में सात किसानों को फोन कर बुलाया गया। लेबर का इंतजाम हैफेड को करना था, उसने हाथ खड़े कर दिए। मजबूरी में मार्केट कमेटी ने सब्जी मंडी से 10-12 लेबर का इंतजाम किया। इस बीच किसान भी आने शुरू हो गए। लेबर ने काम शुरू किया, पर काम उनके बस के बाहर का था या आढ़तियों का दबाव था, कुछ ही देर में वे भाग खड़े हुए। मार्केट कमेटी ने पुलिस के सहयोग से किसी तरह उन्हें दोबारा काम पर लौटने को राजी किया। खरीद तो शुरू हो गई, पर हैफेड के पास फावड़ा समेत ऐसे मौके पर प्रयोग किए जाने वाला कोई कृषि यंत्र नहीं था। इतना ही नहीं, गेहूं तौलने के लिए कांटा भी एक ही था। जब किसानों ने शोर मचाया कि उनके कट्टे क्यों नहीं तौले जा रहे हैं तो फिर हैफेड वालों ने मार्केट कमेटी वालों से मदद मांगी। जिन्होंने सब्जी मंडी से एक कांटा मंगवा कर दिया। इस तरह जैसे-तैसे शाम तक सात किसानों की सात टन गेहूं खरीदी गई। बुधवार को मार्केट कमेटी ने करीब बीस किसानों को बुलाया है। लेकिन लेबर की किल्लत को देखते हुए खरीद की राह आसान नहीं लग रही है।
प्रशासन को राहत, दो नई मंडियों में खरीद शुरू
आढ़तियों की हड़ताल से परेशान प्रशासन के लिए राहत की बात यह रही कि जिले की दो और मंडियों में मंगलवार को गेहूं की खरीद शुरू हो गई। रोहतक में 70 टन और मदीना जैसी कच्ची मंडी में 149 टन गेहूं की खरीद हुई। वहीं, सांपला में सबसे ज्यादा 741 एमटी गेहूं की खरीद हुई, महम मंडी में 76 एमटी गेहूं खरीदा गया। अब तक जिले में 1475 टन गेहूं खरीदा जा चुका है। जिसमें से 1256 हरियाणा वेयर हाउस और 219 हैफेड ने खरीदा है। खरीदे गए गेहूं की लिफ्टिंग अभी नहीं हुई है।
आढ़तियों ने पीपे खड़का कर किया विरोध
सरकार के रवैये से नाराज आढ़तियों ने प्रधान डिंपल बधवार की अध्यक्षता में दोपहर में बैठक की। जिसमें सरकार के तानाशाही रवैये की निंदा की गई। उन्होंने कहा कि राज्य के ज्यादातर जिलों में आढ़ती हड़ताल पर हैं। इसके बावजूद सरकार अपने रुख पर अड़ी है। इस तरह सात-आठ किसानों की फसल खरीद कर सरकार कितने दिन काम चलाएगी। सरकार को आढ़तियों की जायज मांग पर विचार करना चाहिए। शाम करीब चार बजे आढ़ती रोष मार्च निकालते हुए मार्केट कमेटी के दफ्तर पहुंचे। सरकार के रवैये के विरोध में पीपे खड़का कर उन्होंने प्रदर्शन किया। मार्केट कमेटी सचिव दीपक लोहचब ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी बात प्रशासन तक पहुंचा दी जाएगी।
किसान आए आढ़तियों के साथ
किसान सभा ने आढ़तियों की हड़ताल को समर्थन देने का एलान किया है। सभा के प्रधान प्रीत सिंह मंडी में आढ़तियों की बैठक में शामिल हुए। बाद में रोष प्रदर्शन के समय भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सरकार सात किसानों का गेहूं खरीद कर कितने दिन काम चलाएगी। उसे चाहिए कि आढ़तियों की जायज मांग मान कर जल्द से जल्द मैनुअल तरीके से गेहूं खरीद शुरू करवाए। ताकि किसानों को राहत मिल सके।