जींद। जिले के बाजार में लगातार सामने आ रही आग लगने की घटनाओं ने व्यापारी वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। कभी शॉर्ट सर्किट तो कभी मामूली चिंगारी के कारण दुकानों और गोदामों में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो रहा है।
इन घटनाओं का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम व्यापारियों पर पड़ रहा है जिनकी वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी कुछ ही घंटों में खत्म हो जाती है। व्यापारियों का कहना है कि आग लगने की एक घटना कई परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा कर देती है। पीड़ित व्यापारी न केवल भारी आर्थिक नुकसान झेलता है, बल्कि मानसिक तनाव और कर्ज के बोझ में भी दब जाता है।
अधिकांश मामलों में सबसे बड़ी समस्या नुकसान की भरपाई न हो पाना है। छोटे दुकानदार सीमित पूंजी के सहारे कारोबार करते हैं और महंगा बीमा प्रीमियम उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन जाता है इसी कारण वे बीमा नहीं करा पाते। व्यापारी संगठन यह भी मानते हैं कि हर घटना के लिए दुकानदार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
बाजारों में जर्जर बिजली लाइनें, पुराने ट्रांसफॉर्मर, संकरी गलियां और अग्निशमन संसाधनों की कमी जैसे कारण आगजनी की आशंका को बढ़ाते हैं। इसके बावजूद हादसे के बाद नुकसान का पूरा भार व्यापारी पर ही आ जाता है।
-वेद प्रकाश सिंगल
लगातार हो रही आगजनी का असर बाजार की रौनक और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। कई व्यापारी नुकसान के बाद दोबारा दुकान शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते जिससे रोजगार के अवसर घटते हैं और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
-सतीश गोयल
-
व्यापारियों ने मांग की है कि आगजनी, प्राकृतिक आपदा या अन्य आकस्मिक घटनाओं में दुकानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए एक स्थायी राहत नीति बनाई जाए। इस नीति के तहत नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर पीड़ित व्यापारी को समय पर मुआवजा दिया जाए। साथ ही व्यापार आयोग को अधिक अधिकार देकर राहत प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने की भी जरूरत बताई जा रही है।
- मनीष गर्ग
-
बाजारों में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र, बिजली ढांचे का सुधार और नियमित सुरक्षा जांच को अनिवार्य करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
-सक्षम मितल
19जेएनडी14: वेद प्रकाश सिंगल
19जेएनडी14: वेद प्रकाश सिंगल
19जेएनडी14: वेद प्रकाश सिंगल