ट्रेड लाइसेंस फीस को लेकर शहर के व्यापारी व नगर निगम प्रशासन आमने-सामने हो गए हैं। व्यापारियों ने ट्रेड लाइसेंस फीस को लेकर निगम प्रशासन पर मनमानी करने का आरोप लगाया है। व्यापारियों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष के मात्र ढाई माह बचे हैं, लेकिन निगम प्रशासन व्यापारियों से पूरे साल की फीस ले रहा है, जो सरासर गलत है। उधर निगम प्रशासन का कहना है कि व्यापारियों से कोई गलत फीस नहीं, बल्कि नियमानुसार ही फीस ली जा रही है। व्यापारियों ने इस मामले में सोमवार को निगम उप आयुक्त शालिनी चेतल भी ज्ञापन भी सौंपा। साथ ही व्यापारियों का कहना है कि वह इस मामले को लेकर मंगलवार को बैठक भी करेंगे, जिसमें इस मामले को लेकर चर्चा की जाएगी।
ज्ञापन के माध्यम से यह लगाए आरोप
व्यापारियों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि निगम के कर्मचारी ईमानदार भाजपा सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। व्यापारियों के मुताबिक निगम प्रशासन पूरे वित्त वर्ष की फीस लेकर मात्र ढाई महीने के लिए लाइसेंस जारी कर रहा है। ऐसा करके निगम के कर्मचारी अपनी अयोग्यता व लापरवाही की जिम्मेदारी सरकार के खाते में डालना चाहते हैं। व्यापारियों का आरोप है कि निगम प्रशासन ने दबाव में आकर व्यापारियों को ट्रेड लाइसेंस के नोटिस जारी किए हैं, जबकि शहर में काफी संख्या में कैफे, पार्टी हॉल बिना लाइसेंस के अवैध रूप से चल रहे हैं, जिनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
निगम के एक्ट में शामिल है ट्रेड लाइसेंस फीस
निगम के एक्ट के अनुसार शहरी सीमा में किसी प्रकार भी व्यावसायिक गतिविधि करने से पहले निगम से ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य है। यह लाइसेंस न लेने वाले व्यापारी के खिलाफ निगम प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।
व्यापारियों के लिए फायदेमंद है ट्रेड लाइसेंस
ट्रेड लाइसेंस लेने के बाद व्यापारी बिना किसी भय के अपना व्यापार चला सकते हैं। इसका एक और फायदा यह भी है कि अगर किसी दुकानदार की दुकान में आग लगने से नुकसान होता है तो निगम प्रशासन की तरफ से पीड़ित व्यापारी को मुआवजा भी मिलता है। निगम प्रशासन के अनुसार शहर में करीब 10 से 12 हजार व्यापारी हैं, लेकिन इनमें से मात्र एक हजार के पास ही ट्रेड लाइसेंस हैं।
यह कहना है व्यापारियों का
निगम प्रशासन व्यापारियों से अवैध तरीके से फीस वसूल रहा है, जिसे व्यापारी वर्ग सहन नहीं करेगा। इसे लेकर मंगलवार को बैठक की जाएगी, जिसमें इस मामले में चर्चा की जाएगी।
- सुभाष मल्होत्रा, व्यापारी व पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष
बाजार में वैसे ही मंदी चल रही है और ऊपर से निगम प्रशासन लाइसेंस फीस के जरिये आर्थिक बोझ व्यापारी वर्ग पर डाल रहा है। अब निगम पूरे साल की फीस लेकर ढाई महीने के लिए लाइसेंस दे रहा है, जबकि निगम को पूरे साल के लिए लाइसेंस देने चाहिए।
- मुकेश सेहरा, व्यापारी
निगम प्रशासन ढाई माह की जगह पूरे साल की फीस लेकर अपनी मनमानी कर रहा है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। अगर पूरे साल की फीस लेते हो तो लाइसेंस भी पूरे साल का ही दो।
- अशोक कुमार, व्यापारी
जैसे प्रॉपर्टी टैक्स पूरे साल का होता है, वैसे ही ट्रेड लाइसेंस फीस भी पूरे साल की ली जाती है। निगम ने वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही व्यापारियों को लाइसेंस फीस संबंधी नोटिस जारी कर दिए थे। मगर इसके बावजूद व्यापारियों ने फीस जमा नहीं कराई। वैसे ही इस हिसाब से जुर्माना राशि भी बनती है, लेकिन निगम व्यापारियों से जुर्माना नहीं ले रहा। निगम की तरफ से सभी व्यापारियों को नोटिस जारी किए गए थे।
- कृष्ण सैनी, एचवीसी, नगर निगम, हिसार