रोहतक। बाल कल्याण समिति का गठन किशोर न्याय अधिनियम के सामाजिक कार्य के अनुभवी सदस्यों के तहत बुधवार को जिला विकास भवन के डीआरडीए हाॅल में जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय की ओर से प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिला बाल संरक्षण इकाई की ओर से स्टेकहोल्डर्स के लिए कार्यशाला का आयोजन करवाया जाता है। कार्यशाला में किशोर न्याय अधिनियम 2015 और पॉक्सो अधिनियम 2012 पर विचार-विमर्श किया गया।
समिति भी 18 वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों के मामलों पर कार्रवाई करती है, जिन्हें परिवार ने त्याग दिया, अनाथ हो गए, गुमशुदा अथवा बेसहारा हों। इस प्रकार के बच्चों को उनके परिजनों को सुपुर्द करने का कार्य समिति द्वारा किया जाता है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी कुलदीप सिंह ने किशोर न्याय बोर्ड व बाल कल्याण समिति की कार्यप्रणाली के बारे में बताया। बताया कि किशोर न्याय बोर्ड में 18 वर्ष से कम उम्र के उन्हीं बालकों को प्रस्तुत किया जाता है, जो किसी भी प्रकार से कानून के संपर्क में आ गए हैं। बोर्ड में प्रधान मजिस्ट्रेट के साथ दो सदस्यों को शामिल किया गया है। इस प्रकार के बच्चों की जांच के दौरान ऑब्जर्वेशन होम व दोष सिद्ध होने पर स्पेशल होम में भेजा जाता है।
मुख्य वक्ता किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य जय प्रकाश कौशिक ने कहा कि बोर्ड में बच्चों के मामले पुलिस अथवा स्पेशल जुवेनाइल यूनिट की ओर से पेश किया जाता है और सामाजिक जांच के आधार पर ही बालकों की बेल बोर्ड की ओर से निर्धारित की जाती है। इस अवसर पर डीसीडब्ल्यूओ सोमदत्त खुण्डिया, बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा आशा आहूजा व सदस्य रचना, बीना कौशिक, अंजुबाला, किशोर न्याय बोर्ड सदस्य नीलम, जिला बाल संरक्षण इकाई से सुनीता, अमित, पूजा, पूनम व मोनी और संस्थाओं के सदस्य उपस्थित रहे।