फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak News: बच्चों पर न आए आंच...शादी से पहले करा ले थैलेसीमिया की जांच

विज्ञापन
विज्ञापन
बहादुरगढ़। थैलेसीमिया से बच्चे को बचाना है तो शादी से पहले युवक-युवती को रक्त की जांच करा लेनी चाहिए ताकि पता चल जाए कि उनमें थैलेसीमिया के लक्षण तो नहीं हैं। अस्पताल में साल भर में इस तरह के 3-4 मरीज आते हैं। थैलेसीमिया आनुवांशिक रक्त रोग है जिसके पीड़ित को को जन्म से लेकर उम्र भर रक्त चढ़ाना पड़ता है।
विज्ञापन

नागरिक अस्पताल के एसएमओ डॉ. विनय देशवाल ने बताया कि इस बीमारी की पहचान बच्चे में छह माह की आयु के बाद होती है।इससे शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है जिसके कारण रक्तक्षीणता के लक्षण प्रकट होते हैं।
सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है लेकिन थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र सिमटकर महज 20 दिन की हो जाती है। इसका सीधा असर शरीर में मौजूद हीमोग्लोबिन पर पड़ता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाने से शरीर दुर्बल हो जाता है और अशक्त होकर हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहता है। मरीज को हर 15 से 20 दिन में खून बदलवाना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन




थैलेसीमिया के लक्षण

-बच्चों की त्वचा और नाखूनों में पीलापन आने लगता है।

-आंखें और जीभ भी पीली पड़ने लगती है।

-ऊपरी जबड़े में दोष आ जाता है।

-आंतों में विषमताएं आने लगती हैं।

-दांत निकलने में काफी कठिनाई होने लगती है।

-बच्चे का विकास एकदम रुक जाता है।



ऐसे करें बचाव

-रक्त परीक्षण करवाकर इस रोग की उपस्थिति की पहचान करा लेनी चाहिए।

-शादी करने से पूर्व लड़का एवं लड़की के रक्त का परीक्षण करवाएं।

-गर्भधारण के चार महीने के अंदर भ्रूण का परीक्षण कराना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें