चलो थिएटर के पहले दिन श्रोताओं पर तीजन बाई का जादू छा गया। पांडवानी में उनके गायन के दौरान सभागार में तीजन बाई की स्वर लहरी गूंजती रही और श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुर सरिता में गोते लगाते रहे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मदद से बाई ने अपनी प्रस्तुति को इतना गहरा बना दिया कि दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा ली।
छत्तीसगढ़ की पांडवानी लोक कला की पारंगत और पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित डॉ. तीजन बाई ने तंबूरे के माध्यम से महाभारत कथा का मंचन शुरू किया तो श्रोता सांसें थाम कर बैठ गये। उन्होंने पांडवानी में द्रोपदी चीरहरण, महाभारत युद्ध, दुशासन वध, भीष्म और अर्जुन के बीच युद्ध का वर्णन किया। इस दौरान दर्शक इस कदर मंत्रमुग्ध हो गए कि उन्हें अपने आसपास की भी सुध नहीं रही। डॉ. तीजन बाई ने अपनी प्रस्तुति से सभी को महाभारत युग में पहुंचा दिया। प्रस्तुति के समापन पर दर्शक जोरदार तालियां बजाकर उनकी वाहवाही की। इस नाटक में दुलेश्वर निर्मलकर, केवल देशमुख, नरोत्तम नीलम, मनहरण सर्वा, तिरेंद्र कुमार और रामचंद निशाद ने महाभारत पर्व के अनेक किस्सों को दर्शाया।
देश के चुनिंदा सात राष्ट्रीय रंग कर्मियों को किया गया सम्मानित
एमडीयू के राधाकृष्णन सभागार में शनिवार को रास कला मंच की ओर से नेशनल थिएटर फेस्टिवल का शानदार आगाज हुआ। फेस्टिवल की शुरूआत देश के चुनिंदा सात राष्ट्रीय रंग कर्मियों को सम्मानित करके की गई। इन्होंने अपने क्षेत्रों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को विशेष पहचान दिलाई है। इस मौके पर चित्रकार स्वर्गीय राममेहर मलिक की कला कृतियों की पेंटिंग प्रदर्शनी लगाई गई।
चलो थिएटर फेस्टिवल का शुभारंभ मुख्यातिथि एमडीयू के कुलपति बिजेंद्र पूनिया ने किया। उन्होंने कहा कि लुप्त होते जा रहे थियेटर को रास कला मंच की टीम ने एक बार फिर से रोहतक में जीवंत कर दिया है। थिएटर फेस्टिवल से रंगकर्मी दोबारा से शहर की फिजा में भाईचारे के रंग भरेंगे। उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविकता को स्टेज के माध्यम से प्राकृतिक रूप से प्रस्तुत करना ही थिएटर है, जिसे रास कला मंच बखूबी निभाता आ रहा है। सात दिनों तक चलने वाले नेशनल थियेटर फेस्टिवल से समाज को सामाजिक समरसता का संदेश मिलेगा। इसके अलावा शहीद भगत सिंह, रामायण आदि नाटकों के मंचन से समाज और देश को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। इस अवसर पर विवि की प्रथम महिला डॉ. वंदना पूनिया, डीन, स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. राजबीर सिंह, निदेशक युवा कल्याण डॉ. जगबीर सिंह, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी, प्रकाश देवी, डॉ. मनोज मलिक, सुनीता मलिक, डॉ. अजय घनघस, रचना घनघस, रास कला मंच के अध्यक्ष रवि मोहन मौजूद रहे।