शिला बाईपास स्थित शमशान घाट में लगी विधुत शव जलाने की मशीन । संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। रामबाग स्थित श्मशान में लाखों रुपये की लागत से अपग्रेड किए गए शहर के पहले गैस व बिजली आधारित मोक्ष केंद्र का पहला ट्रायल सफल रहा। केंद्र का तापमान 750 डिग्री तक पहुंचा, जिससे 50 मिनट में एक लावारिस शव राख में तब्दील हो गया। केवल चंद हड्डी बची हैं। अब केंद्र में तीन और लावारिस या गले शवों का ट्रायल किया जाएगा। ताकि यह पता लग सके कि शवों के अंतिम संस्कार के दौरान आसपास के एरिया में बदबू आती है या नहीं। इसके बाद कोरोना संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति का यहां अंतिम संस्कार होगा।
बता दें कि सात साल पूर्व रामबाग श्मशान में सामाजिक संस्थाओं व संचालन कमेटी ने मिलकर गैस व बिजली से आधारित मोक्ष केंद्र स्थापित किया था, जिसमें शवों को चंद मिनटों में अंतिम संस्कार हो जाता था। डेढ़ साल बाद आसपास के लोगों ने शिकायत की कि मोक्ष केंद्र में संस्कार से आसपास के एरिया में बदबू फैल जाती है। मामला तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक पहुंचा। शिकायत पर हुड्डा ने अधिकारियों को जांच करने के आदेश दिए। इसके बाद मोक्ष केंद्र को बंद कर दिया गया। अब कोरोना काल में जिले में 20 के करीब दम तोड़ चुके हैं। कोरोना संक्रमण से मरने वाले मरीजों का विशेष सावधानी के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है। शव भी परिजनों की बजाय निगम की टीम को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सौंपा जाता है। शव जलाने के लिए निगम ने वैश्य संस्था के नजदीक शिव मंदिर श्मशान व दफनाने के लिए जींद रोड स्थित कब्रिस्तान का चयन किया हुआ है। शिव मंदिर श्मशान संचालन कमेटी व आसपास के लोगों ने कोरोना संक्रमित मरीज के शव का अंतिम संस्कार शहर से बाहर करने की मांग की थी। डीसी ने एक बार तो झज्जर रोड के नजदीक एमडीयू की खाली पड़ी जगह चिह्नित की। हालांकि बाद में आदेश वापस ले लिए। इसके चलते अभी शिव मंदिर श्मशान में ही अंतिम संस्कार हो रहा है।
समाजसेवी संगठनों ने की पहल, लाखों रुपये खर्च कर कराया अपग्रेड
शहर में एकमात्र बिजली व गैस संचालित मोक्ष केंद्र शीला बाईपास स्थित रामबाग श्मशान में था, लेकिन तकनीकी खामी के चलते वह बंद पड़ा था। मेयर मनमोहन गोयल के साथ मिलकर समाजसेवी संस्थाओं ने मिलकर पैसे एकत्रित किए और पंचकूला से टीम बुुलाकर उसे ठीक करवाया गया।
बिजली व गैस आधारित शहर का एकमात्र मोक्ष केंद्र पहले ट्रायल में सफल रहा। एक लावारिस शव का अंतिम संस्कार किया गया। अभी कम से कम तीन और लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। ताकि अच्छी तरह से पता लग सके कि संस्कार के दौरान या बाद में आसपास के एरिया में बदबू आती है या नहीं। इसके बाद कोरोना संक्रमित मरीज के शव का अंतिम संस्कार होगा।
-मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम।