देश में चल रहे को-वॉक्सिन के तीसरे फेज की ह्यूमन ट्रायल पीजीआईएमएस रोहतक, हैदराबाद व गोवा से शुरू होगी। इसके तहत शुरुआत में तीनों संस्थानों में 200-200 वालंटियरों को जल्द ही वैक्सीन की डोज दी जाएगी। यह डोज छह-छह एमजी की होगी, पहली डोज के 28 दिन बाद दूसरी डोज दी जाएगी और 48 दिन बाद वालंटियर के शरीर में एंटीबॉडी की जांच की जाएगी। सही परिणाम मिलने पर देशभर में चिह्नित 21 संस्थानों में फिर कुल 25,800 वालंटियरों को यह डोज दी जाएगी। यह जानकारी पीजीआईएमएस के कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने दी।
कुलपति डॉ. कालरा ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि को-वॉक्सिन किलड वैक्सीन है, इसके चलते इसके खतरे काफी कम है। अभी तक की रिसर्च में एक दो वालंटियर को हल्का बुखार व टीके के स्थान पर दर्द जैसी समस्या आई है। हमारे सभी वालंटियर स्वस्थ हैं और अभी तक किसी को कोरोना होने की रिपोर्ट भी नहीं है। आने वाले समय में रिसर्च में देखा जाएगा कि वैक्सीन का क्या साइड इफेक्ट है और इसका असर कितने दिन रहता है। क्योंकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि वैक्सीन लगने के बाद बनने वाली एंटीबॉडी का असर कितना समय रहता है। आगामी एक साल तक वालंटियरों के अंदर एंटीबॉडी की जांच होगी। कुलपति ने बताया कि अब छह एमजी की ही डोज लगेगी, क्योंकि शुरुआत में छह व नौ एमजी की डोज दी गई थी। इसके लगने के बाद कोई खास फर्क देखने को नहीं मिला, इसलिए छह एमजी की वैक्सीन की डोज ही काफी है। फेज वन व टू में हम अभी तक कामयाब रहे हैं। इस मौके पर निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव, रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल, को-वॉक्सिन रिसर्च की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. सविता वर्मा, को-इन्वेस्टिगेटर डॉ. रमेश वर्मा आदि मौजूद रहे।
हरियाणा की 1.01 मृत्युदर, इसे नीचे लाने का प्रयास
कुलपति ने बताया कि विदेश में कोरोना संक्रमितों की मृत्युदर पांच से सात प्रतिशत रही है, जबकि हमारे देश में यह दो से ढाई प्रतिशत रही है। हरियाणा में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर 1.01 प्रतिशत चल रही है और प्रयास किया जा रहा है कि इसे एक से भी कम लाया जाए। अधिकारी ने बताया कि पीजीआईएमएस में गंभीर स्थिति वाले मरीज आते हैं, ऐसे में समस्या होती है। ए कैटेगरी वाले मरीजों को होम आइसोलेशन पर रखा जाता है, जबकि जिन्हें उपचार की जरूरत होती है उन्हें विश्व भर में दी जा रही हर तरह की दवा देकर निशुल्क उपचार किया जाता है। संस्थान में वेंटिलेटर, दवा, स्टाफ किसी की कोई कमी नहीं है। हमारे यहां लो बीपी व कम ऑक्सीजन वाले मरीजों को भी बचाया गया है। घर पर रह रहे मरीजों की टीम मॉनीटरिंग करती है। कुलपति ने बताया कि जब तक वैक्सीन नहीं आती तब तक मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है।
फरवरी के बाद बाजार में आ सकती है वैक्सीन
कुलपति ने बताया कि फरवरी के बाद वैक्सीन बाजार में आ सकती है। भारत बॉयोटैक से वैक्सीन आईसीएमआर के पास और बाद में वह मास मैन्यूफैक्चरिंग के साथ बाजार में वैक्सीन उपलब्ध कराएंगे।