रोहतक। हरियाणा रोडवेज की बसों के साथ प्राइवेट बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तो है, लेकिन इनके अंदर दवाएं और मरहम पट्टी गायब हैं। कुछ बसों में तो इन बॉक्सों का प्रयोग पूजा स्थल के लिए किया है। अधिकांश फर्स्ट एड बाॅक्स खाली हैं, इनमें दवाओं की जगह अन्य सामान है। इनका प्रयोग पानी की बोतल, मोबाइल चार्जर समेत अन्य चीजों को रखने के लिए हो रहा है। आपात स्थित में चोट लगना तो दूर, इनमें सिरदर्द की दवा भी नहीं मिलेगी।
अमर उजाला की टीम ने नौ सितंबर को वर्ल्ड फर्स्ट एड डे पर हरियाणा रोडवेज के बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की हालत जानी तो परिणाम हैरान करने वाले थे। 22 से अधिक बसों में फर्स्ट एड बाक्स खाली मिले। भिवानी डिपो की नई बस में ड्राइवर सीट के साइड में फर्स्ट एड बाक्स लगा मिला। लेकिन खोलकर देखा गया तो उसमें भी कुछ नहीं दिखा, वह पूरी तरह खाली था। गुरुग्राम की तरफ जाने वाली बस की जांच की तो बाक्स में पानी की बोतल मिली। स्पेशल महिलाओं के लिए चलने वाली बस का फर्स्ट एड बाक्स भी खाली मिला। बस में मौजूद छात्राओं ने बताया कि रोडवेज प्रशासन की यह घोर लापरवाई है, अगर किसी तरह का हादसा हो जाए तो उपचार के लिए अस्पताल ही भागना पड़ेगा। जबकि परिचालकों को रेडक्रास की ओर से इसका प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होता है। लेकिन धरातल पर सब अभियान फेल हो जाते हैं।
फर्स्ट एड बाक्स के लिए परिचालक की होती है जिम्मेदारी
बसों के अंदर फर्स्ट एड बाक्स की जिम्मेदारी परिचालक की होती है। उसके लिए विभाग चयन से पहले ही फर्स्ट एड के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट मांगता है। अगर किसी ने फर्स्ट एड से संबंधित ट्रेनिंग ही नहीं ली तो उसका विभाग चयन तक नहीं करता है। लेकिन लापरवाई के कारण यात्रियों को अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है। रूट पर चलने से पहले परिचालक को बस के अंदर होने वाली सुविधाओं की जांच करना बहुत जरूरी होता है। लेकिन जो सबसे जरूरी चीज होती है, वहीं बस के अंदर मौजूद न होने के कारण इसमें परिचालक ही नहीं अधिकारी भी लापरवाई की श्रेणी में आते हैं।
फर्स्ट एड बाक्स सभी बसों में लगे हुए हैं। सभी बसों में दवाइयां भी मौजूद हैं। अगर किसी बस में इस तरह की दिक्क्त चल रही है तो उन बसों की सुबह ही जांच करवाई जाएगी। इसमें कोई भी परिचालक लापरवाई करते हुए मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेंद्र सिवाच, वर्कशाप मैनेजर, रोडवेज डिपो