हम कीव में हैं। यहां दनादन बम गिर रहे हैं। सुबह ही आपातकाल लागू हुआ है। सुपर मार्केट खुलते ही हमने अपने खाने पीने का सात दिन का राशन व पानी खरीद लिया है। हम सब हॉस्टल के बेसमेंट हैं। यहां हमारे विश्वविद्यालय के अलावा अन्य संस्थाओं समेत करीब 500 से ज्यादा विद्यार्थी हैं। हम सुरक्षित हैं। बाहर हाल बुरा है। खाने-पीने का सामान महंगा ही नहीं खत्म भी हो गया है। लोगों को सुरक्षित बंकरों की तलाश है। यह कहना है हरियाणा के रोहतक शहर के कमला नगर निवासी हाल में कीव में रह रहे प्रदीप का। वह वहां अपनी दो बहनों के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया था।
यह अकेला ऐसा युवा नहीं है, बल्कि उस सरीखे जिले के 25 से ज्यादा 18 से 25 वर्ष के युवा वहां फंसे हुए हैं। इन्हें घर लौटने के लिए माहौल शांत होने व फ्लाइट चलने का इंतजार है। इन युवाओं ने गुरुवार को युद्ध का माहौल और अपने हालात अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में साझा किए।
प्रदीप ने बताया कि यूक्रेन के कीव में मेडिकल यूनिवर्सिटी है। यहीं हमारा हॉस्टल है। मेरी बहन एमबीबीएस चौथे वर्ष की छात्रा निकिता, तीसरे वर्ष की छात्रा नेहा व मैं खुद प्रथम वर्ष का छात्र हूं। इसके अलावा रोहतक व आसपास के जिलों के करीब 15 से 20 विद्यार्थी हैं। यहां दूसरे विवि व संस्थाओं के भी विद्यार्थी हैं। सभी को सुरक्षित बेसमेंट में रखा गया है। इससे पूर्व सुबह सात दिन का राशन खरीद लिया है।
इसके लिए सामने ही सुपर मार्केट खुली थी। दोपहर बाद यहां हालात बिगड़ गए। लोगों को न राशन मिला न पानी। दाम भी बढ़ गए। हमले के कारण एयरपोर्ट खत्म हो गया है। एयर स्पेस पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अगले आदेशों तक न कोई फ्लाइट उड़ेगी न उतरेगी। ऐसे में अभी घर आने का रास्ता भी नहीं बन रहा है। फिलहाल कुछ दिन यहीं रहना पड़ेगा। घर पर बात हो रही है। सभी अपने परिवार के संपर्क में हैं।
बंकर हैं, जाएं कैसे पता नहीं
वन सिटी हॉल जैप्रोसिया यूक्रेन निवासी एमबीबीएस छात्र अनुवाक ने बताया कि मैं अपने फ्लैट पर हूं। यहीं मेरे झज्जर, मुंबई, गुजरात व दिल्ली के दोस्त भी हैं। इनमें परमजीत सिंह, फैज शेख, अर्पित शर्मा, जय पटेल, साहिल शामिल है। हम सभी सुरक्षित हैं। युद्ध यहां से करीब 500 मीटर दूर यूक्रेन की राजधानी कीव में चल रहा है। यहीं बमबारी हो रही है। रूस की सेना ने ओडेसा के एक ऊंचे भवन पर अपना झंडा भी फहरा दिया है। लोगों को खाने पीने की समस्या हो रही है।
जिन्होंने सुबह राशन खरीद लिया, उनके अलावा शेष को महंगे दाम पर भी राशन नहीं मिला है। पीने के पानी के लिए भी लोग मारे-मारे फिर रहे हैं। हालात बेहद नाजुक हैं। लड़ाई लंबी चली तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जिनके पास खाने पीने का सामान नहीं है। एटीएम भी खाली हो चुके हैं। रोहतक व अन्य जगहों के विद्यार्थियों के लिए पीजी व होस्टल ही सहारा हैं। सुरक्षा के लिए बंकर हैं। ये कहां हैं या वहां तक कैसे जाएं, कोई नहीं जानता।
70 से 80 हजार में भी नहीं मिली फ्लाइट
शिमली हाल सूमि में रह रहे एमबीबीएस छात्र मोहित धनखड़ ने कहा कि बुधवार रात कीव में ही था। फ्लाइट रद्द होने के साथ हमले की जानकारी मिलने पर यहां से सूमि आ गया। यह रूस की सीमा से लगता छोटा इलाका है। हमला राजधानी कीव में हो रहा है। इसलिए सुरक्षित हूं। प्रशासन ने बेसमेंट खोलने के निर्देश दे दिए हैं। लोगों ने भी अपने घरों में बने बंकर नूमा बेसमेंट खोल कर उनमें खुद को सुरक्षित कर लिया है।
हालात कब बिगड़ जाएं, कोई नहीं जानता। इसलिए शेल्टर खोले गए हैं। सरकार को चाहिए कि भारतीय विद्यार्थियों को इस माहौल से निकाला जाए। घर आने के लिए टिकट नहीं मिल रही थी। मैंने 70 से 80 हजार रुपये में टिकट लेने का प्रयास किया, मगर नहीं मिली। अब एयरपोर्ट ही खत्म हो गए हैं। ऐसे में खुद को सुरक्षित रखने का प्रयास है।