सांपला। मानसून सीजन को देखते हुए सिंचाई विभाग ने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। बारिश के दौरान गांवों और खेतों में पानी जमा न हो इसके लिए क्षेत्र की सभी प्रमुख ड्रेनों की सफाई शुरू कर दी गई है।
विभाग ने 25 जून तक सफाई कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है ताकि मानसून आने से पहले जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त हो सके। मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसून सीजन में सामान्य से करीब 96 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान जताया है।
ऐसे में प्रशासन और सिंचाई विभाग पहले से ही सतर्कता बरत रहे हैं। मानसून शुरू होने में लगभग 20 दिन शेष हैं और इसी अवधि में जल निकासी तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
क्षेत्र में करीब 49 ड्रेन और सात माइनर हैं, जो सिंचाई और जल निकासी व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनमें मेन गांधरा, कुलताना और पाकस्मा ड्रेन सबसे महत्वपूर्ण हैं, जो लगभग 23 गांवों को बाढ़ और जलभराव से बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
वहीं, दुलहेड़ा माइनर और भालोट नहर प्रमुख जल स्रोत हैं। विभिन्न क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटरी से माइनर और सब-माइनर भी निकाली गई हैं। अधिकारियों के अनुसार समय के साथ ड्रेनों में मिट्टी जमा होने, घास और झाड़ियां उगने से पानी का बहाव प्रभावित होता है।
इससे बारिश के दौरान पानी की निकासी बाधित हो जाती है और जलभराव की स्थिति बनती है। सफाई के बाद ड्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और वर्षा जल का तेजी से निकास संभव हो सकेगा। मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी को नहरों और माइनरों के माध्यम से सुरक्षित रूप से निकाला जाएगा।
पांच हजार एकड़ क्षेत्र में हर साल जलभराव
लगातार बारिश के दौरान कई बार नहरों में पानी का दबाव बढ़ने से ओवरफ्लो की स्थिति बन जाती है। इसके कारण चुलियाणा, खरावड़, गांधरा, इस्माईला, कसरेंटी, समचाना और मोरखेड़ी गांवों के आसपास लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र हर वर्ष जलभराव की चपेट में आ जाता है। इससे खरीफ फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए सिंचाई विभाग की मैकेनिकल शाखा ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।