संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। सहकारी समिति की प्राइवेट बसों में यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निजी बसों की इन दिनों खिड़कियों के शीशे पूरी तरह से बंद नहीं हो रहे हैं। डिपो के अंतर्गत आने वाली 10 प्रतिशत प्राइवेट बसों में शीशे भी टूटे हुए हैं और अनेक बसों के शीशे ढीले हैं।
आरटीओ के अंतर्गत 175 सहकारी समिति की प्राइवेट बसें हैं जिन्हें अलग-अलग मार्गों पर संचालित किया जा रहा है। टीम ने सुबह बसों में सवार होकर स्थिति को देखा। ठंड के दिनों में इन बसों के शीशे की समस्या से यात्रियों को परेशानी हो रही है।
चरखी दादरी मार्ग पर सुबह करीब 10 बजे प्राइवेट बस की चार खिड़कियों के शीशे पूरी तरह से बंद नहीं दिखे। खिड़की के पास बैठी एक महिला से पूछा कि शीशा बंद नहीं हो रहा क्या है? महिला ने जवाब दिया कि शीशा जाम है। हालांकि, 80 प्रतिशत शीशा बंद था लेकिन शेष हिस्से से ठंडी हवा आ रही थी।
सोनीपत मार्ग की प्राइवेट बस में सुबह 9 बजे सात खिड़कियों के शीशे आवाज कर रहे थे। शीशों को बंद करने की कोशिश की लेकिन बंद नहीं को सके। पूछने पर खिड़की के पास बैठे यात्री ने कहा, सर्दियों में किसको शौक है ठंडी हवा में सफर करने का।
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बसों में कभी-कभी हादसे से कारण शीशे टूट जाते हैं। बस संचालक शीशों को ऑर्डर करवाकर बदलवा लेते हैं। सर्दी के मौसम में सभी परिचालकों से आह्वान किया है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियात बरतें।
- डॉ. धन सिंह, राज्य प्रधान, सहकारी समिति
रोडवेज बसों की कमी से यात्री निजी बसों में तो सवार हो जाते हैं लेकिन इनमें न सफाई और न ही खिड़कियों की स्थिति ठीक है। सर्दी में भी खिड़की से हवा अंदर आ रही है
- रोहित जांगड़ा, यात्री
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सांपला से रोहतक प्रतिदिन बसों में आवागन करते हैं। अधिकतर निजी बसों के शीशे खस्ताहाल हैं। शीशे पूरी तरह से बंद न होने के कारण सर्दियों में परेशानी हो रही है।
- महक, छात्रा।
02...रोहतक में सहकारी समिति की निजी बसों में आधे-अधूरे खुले शीशे से परेशानी यात्री। संवाद
02...रोहतक में सहकारी समिति की निजी बसों में आधे-अधूरे खुले शीशे से परेशानी यात्री। संवाद
02...रोहतक में सहकारी समिति की निजी बसों में आधे-अधूरे खुले शीशे से परेशानी यात्री। संवाद