रोहतक। पीजीआई में मरीज की मौत को लेकर हुआ हंगामा रविवार को सुलझ गया। संस्थान ने मरीज के परिजनों को बुलाकर समझाया कि मरीज की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। किसी भी डॉक्टर की तरफ से इसमें कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।
वार्ड-3 में शुक्रवार देर रात को मरीज के साथ आए तीमारदारों की ओर से जूनियर रेजिडेंट डॉ. पराग के साथ बदसलूकी कर मारपीट का मामला सामने आया था। इसको लेकर वार्ड में जमकर विवाद हुआ था। डॉक्टर के अनुसार मरीज का हार्ट 10 प्रतिशत ही काम कर रहा था जिसके चलते उसे बचाया नहीं जा सका। जैसे ही स्वजनों को मरीज की मौत की जानकारी दी गई वे भड़क गए।
इसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि वार्ड में सामान की तोड़फोड़ भी की गई। उस समय डॉक्टर वार्ड में अकेले थे। विवाद बढ़ता देख उन्होंने कई बार कंट्रोल रूम व सिक्योरिटी से संपर्क करने का प्रयास किया। वहां सुरक्षा व्यवस्था का कोई प्रबंध नहीं था। हालांकि, रविवार को वार्ड में महिला व पुरुष गार्ड ड्यू्टी पर दिखे। इस दिन वार्ड के बेड भी खाली दिखाई दिए।
इसको लेकर डॉक्टर ने विभाग को भी शिकायत भी की है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। पीजीआई में लगातार डॉक्टरों से मारपीट व हंगामे के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले भी ट्रामा सेंटर में डॉक्टर व तीमारदारों के बीच अल्ट्रासाउंड में देरी को लेकर विवाद हो गया था। इसकी आधिकारिक पुष्टि करने के लिए कई बार चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल से संपर्क करने का प्रयास किया गया। व्हाट्सएप पर भी मैसेज कर पक्ष मांगा गया लेकिन उनकी तरफ से मैसेज देखकर अनदेखा कर दिया गया।