रोहतक। रेलवे स्टेशन पर लोग हर दिन अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। प्लेटफाॅर्म बदलने के लिए पुल का उपयोग न कर पटरी पार करने का खतरा मोल लेते हैं। उनकी जल्दबाजी और लापरवाही में हर साल कई लोगों की जिंदगी की डोर छूट जाती है। पिछले वर्ष ट्रेन की चपेट में आने के कुल 100 हादसे हुए। इसमें 82 लोगाें की जान चली गई। शेष 18 लोग दिव्यांगता का जीवन जीने काे विवश हैं।
रेलवे स्टेशन पर प्लेटफाॅर्म बदलने के लिए यात्री अपनी ही जान दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटते हैं। ट्रेन आने से ठीक पहले पटरी पर उतरकर दूसरे प्लेटफाॅर्म की ओर उनकी दौड़ कई बार जीवन की अंतिम दौड़ साबित होती है। ऐसे हादसों पर अंकुश के लिए रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ व जीआरपी की टीमें तैनात रहती हैं। ये लोगों को समझाते भी हैं। इसके बावजूद न तो लोग मान रहे हैं और न हादसे रुक पा रहे हैं।
दो वर्ष में 185 यात्री जान गंवा चुके
पिछले दो वर्ष में कलानौर, महम, रोहतक रेलवे स्टेशन पर करीब 185 यात्री रेलवे ट्रैक पार करने या अन्य हादसों में ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले साल हुए हादसों में 103 लोगों ने जान गंवाई। रोहतक रेलवे स्टेशन पर दो प्लेटफाॅर्म हैं। यहां से नॉन स्टॉप ट्रेनें 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरती हैं। ऐसे में कोई इनके मार्ग में आ जाए ताे बचना असंभव है। संवाद
रेलवे ट्रैक पर पिछले चार साल में हादसों का ब्योरा
वर्ष मौत
2021 50
2022 70
2023 103
2024 82
रेलवे स्टेशन पर लोगों को ट्रैक पार करने के लिए रोका जाता है। ट्रैक पार करते समय होने वाले हादसों पर अंकुश लगाने के लिए अभियान भी चलाए जाते हैं। हादसा रोकने के लिए हर समय स्टेशन पर जीआरपी के जवान तैनात रहते हैं।
- बृजपाल सिंह, प्रभारी, जीआरपी थाना।
रेलवे स्टेशन पर लोगों को ट्रैक पार करने से रोका जाता है। इसके लिए आरपीएफ की ओर से जवान की ड्यूटी लगाई गई है। जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है।
- रूपचंद मीना, प्रभारी, आरपीएफ थाना।