देश की उन्नति में राष्ट्रभाषा का अहम योगदान होता है। राष्ट्रभाषा ही देश के नागरिकों को एकता के सूत्र में पिरोते हुए हमारे विचार व संवाद एक-दूसरे तक पहुंचाती है। इसके चलते हिंदी देशवासियों के बीच एक सेतु की तरह है। इस सेतु को मजबूत व सुविधाजनक बनाने की जरूरत है। इससे सभी इसका उपयोग कर सकेंगे और मातृभाषा का फैलाव होगा। मातृभाषा को सम्मान मिलने से देश का गौरव भी बढ़ेगा। दुनिया में हमारी अलग पहचान होगी व हम दूसरों के लिए खास महत्व रखेंगे। ये बातें अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत हिंदी को बढ़ावा देने के मुद्दे पर विभिन्न क्षेत्र के लोगों से बातचीत में सामने आई। सभी ने एक स्वर में मातृभाषा के प्रोत्साहन व विकास पर जोर दिया।
इंटरनेट पर हिंदी पढ़ने वालों का हो रहा इजाफा
इंटरनेट पर हिंदी का दायरा ब्लॉग्स को लांघ चुका है। हिंदी अखबारों की वेबसाइट्स ने करोड़ों नए पाठकों को अपने साथ जोड़कर हिंदी को और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंटरनेट पर हिंदी के बढ़ते चलन से माना जा रहा है कि अगले साल तक हिंदी में इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या अंग्रेजी में इसका उपयोग करने वालों से ज्यादा हो जाएगी। सर्च इंजन गूगल का मानना है कि हिंदी में इंटरनेट पर सामग्री पढ़ने वाले प्रति वर्ष 94 फीसदी बढ़ रहे हैं। जबकि अंग्रेजी में यह हर साल 17 फीसदी घट रही है। गूगल के अनुसार 2021 तक इंटरनेट पर 20.1 करोड़ लोग हिंदी का उपयोग करने लगेंगे। यह हिंदी के प्रचार-प्रसार व वैश्विक स्वीकार्यता का ही परिणाम है।
-डॉ. पूनम शर्मा, एमडी, दीक्षा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट।
शब्दकोष में नए-नए शब्दों की हो रही वृद्धि
विश्वभर में हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता का ही असर है कि वर्ष 2017 में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी पहली बार ‘अच्छा’, ‘बड़ा दिन’, ‘बच्चा’ और ‘सूर्य नमस्कार’ सरीखे हिंदी के शब्दों को सम्मिलित किया गया है। अमेरिका की ‘ग्लोबल लैंग्वेज मॉनीटर’ संस्था ने अपनी रिपोर्ट में अंग्रेजी भाषा में करीब 10 लाख शब्द होने का दावा किया हैं। वहीं हिंदी में यह करीब एक लाख 20 हजार शब्दों का समृद्ध कोष है। हिंदी शब्दकोष में लगातार नए-नए शब्दों की वृद्धि हो रही है। तकनीकी रूप से हिंदी को और ज्यादा उन्नत, समृद्ध व आसान बनाने के लिए अब कई सॉफ्टवेयर भी हिंदी के लिए बन रहे हैं।
-डॉ. अंजू शर्मा, प्रोफेसर, हिंदी विभाग, गौड़ ब्राह्मण डिग्री कॉलेज।
कार्यालयों में हिंदी को कामकाजी भाषा बनाना होगा
हिंदी भाषा को देश के साथ वैश्विक भाषा बनाया जा सकता है। देश में हिंदी बातचीत और व्यवहारिक भाषा के साथ विदेश में भी बोली व समझी जाने वाली भाषा बन रही है। ऐसे में हिंदी का दायरा तो बढ़ रहा है, मगर इसे इसकी वास्तविक पहचान दिलाना शेष है। मातृभाषा को उसका सम्मान दिलाने के लिए देश में हिंदी भाषी के साथ गैर हिंदी भाषी क्षेत्र में भी हिंदी का प्रचार-प्रसार करना होगा। देश के कार्यालयों में हिंदी को कामकाजी भाषा बनाना होगा। यूपीएससी सरीखी परीक्षाएं हिंदी में कराने के साथ ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देनी होगी। हमें ऐसी नई व्यवस्था बनानी होगी, जिससे पूरे देश में समान रूप से एक ही भाषा में संवाद हो सके।
-लेनिन सिंह, राजकीय उच्च विद्यालय सिंहपुरा।