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रतन चंदेल
रोहतक। बाबा मस्तनाथ मठ में इन दिनों देशभर से हजारों की संख्या में रैबारी समाज के लोग पहुंचे हुए हैं। इनमें हरियाणा के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र आदि प्रदेशों से आए 5000 से अधिक लोग शामिल हैं।
बाबा मस्तनाथ से रैबारी समाज का पारिवारिक संबंध होने के चलते मठ में इन्हें विशेष आदर दिया जाता है और वे इसे अपना प्रमुख आस्था केंद्र भी मानते हैं।
बाबा मस्तनाथ ने अस्थल बोहर मठ का पुनरुद्धार किया था। इसी कारण यहां राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश के रबारी पहुंचे हुए हैं जिनमें महिलाएं व बच्चे भी काफी संख्या में हैं। संवाद
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ये है पारिवारिक संबंध
फरीदाबाद से यहां आए रैबारी समाज के बुजुर्ग अमृत सिंह व राजस्थान के लक्ष्मण सिंह, पंजाब के महाबीर व एमपी से आए राजाराम ने बताया कि सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्तनाथ ने रबारी हिंदू समुदाय में सबला रबारी के घर अवतार रूप लिया था। बाबा मस्तनाथ का अवतरण स्थान रोहतक जिला में है लेकिन पूरे देशभर से रैबारी समाज का उनसे पारिवारिक नाता है। इसी कारण वे हर साल यहां मेले पर आते हैं और मठ में सेवा करते हैं।
बाबा की समाधि पर पूजा के बाद रैबारी समाज पूजा पाठ करता है। जब तक समाज के लोग माथा टेकते हैं तब तक महंत समाधि के पास ही जमीन पर आसन लगाकर बैठे रहते हैं।
-अमृत सिंह, फरीदाबाद, हरियाणा।
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बुजुर्गाें से सुने इतिहास के अनुसार रैबारी समाज के सबला महाराज सदियों पहले रोहतक में निवास करते थे। गुरु गोरखनाथ के परम भक्त के घर 60 की उम्र में भी कोई संतान नहीं थी। गुरु के आशीर्वाद से उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ। वही बाबा मस्तनाथ कहलाए। मठ के भंडारे में रबारी समाज की खास भूमिका रहती है।
-लक्ष्मण सिंह, बूंदी, राजस्थान।