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Rohtak News: राजस्थान और मध्यप्रदेश से संबंध रखने वाले कर्मचारी और छात्र भी जांच के घेरे में

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रोहतक। दादा लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (डीएलसी सुपवा) में अफीम के पौधे मिलने की घटना को लेकर पुलिस सख्त हो गई है। 15 दिन बाद भी फीडबैक न मिलने पर पुलिस ने नाराजगी व्यक्त की है। यूनिवर्सिटी प्रशासन को हिदायत देते हुए जल्द से जल्द आंतरिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जिससे जांच को आगे बढ़ाया जा सके।
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साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान के कर्मचारी और छात्रों की जानकारी भी मांगी है। इससे उनके परिवार का फीडबैक भी लिया जा सकेगा। वहीं, एंटी नारकोटिक्स सेल ने इस संबंध में जानकारी देने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 7082999802 भी जारी किया है। जिससे कोई छात्र या कर्मचारी सूचना देना चाहे तो हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दे सके। इस नंबर पर दी गई सूचना को पुलिस गोपनीय रखेगी।

सुपवा यूनिवर्सिटी में अफीम के 150 पौधे मिलने पर 27 मार्च को एक फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसकी जानकारी होने पर नारकोटिक्स सेल और अर्बन एस्टेट थाना पुलिस ने संज्ञान लिया। वहीं, एफएसएल प्रभारी सरोज दहिया समेत अन्य टीम ने नमूने भी संग्रह किए थे। नारकोटिक्स सेल ने सुपवा प्रशासन से अपनी इंटरनल जांच रिपोर्ट देने के लिए 10 दिन का समय दिया था, लेकिन 15 दिन बाद भी आंतरिक रिपोर्ट न देने पर चेतावनी दी है। साथ ही कहा कि वह आंतरिक रिपोर्ट के साथ-साथ राजस्थान और मध्यप्रदेश के छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों की सूचना भी दें। पुलिस ने हेल्प लाइन नंबर भी यूनिवर्सिटी के ग्रुप में शेयर करने के लिए सुपवा प्रशासन से कहा है, जिससे कोई छात्र-छात्रा या कर्मचारी अफीम के पौधों के संबंध में कोई जानकारी देना चाहे तो दे सकता है।
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मध्यप्रदेश-राजसथान में होती है खेती
पुलिस अधिकारियों की माने तो अफीम की खेती कोई भी व्यक्ति नहीं कर पाता है। जिसको जानकारी होती है वहीं, इसकी बिजाई कर सकता है। चूंकि राजस्थान और हरियाणा में लाइसेंस पर इसकी खेती होती है। कहीं, ऐसा तो नहीं किसी कर्मचारी या छात्र के घर पर लाइसेंस लेकर खेती की जा रही हो और उसने यूनिवर्सिटी में कुछ पौधे लगा दिए हो। इसलिए दोनों प्रदेशों के कर्मचारी और छात्र-छात्राएं भी जांच के घेरे में है।
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150 पौधों को कराया जा चुका है नष्ट
डीएसपी गुलाब सिंह और अर्बन एस्टेट थाना प्रभारी ने यूनिवर्सिटी में मिले अफीम के 150 पौधों को नूमने लेने के बाद नष्ट करा दिया है। हालांकि अभी इनकी रिपोर्ट आनी बाकी है।


पुलिस ने की अपील...
पुलिस अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी से अपील की है कि पौधे मिलना बड़ी बात नहीं है, लेकिन उसके पीछे का मकसद बड़ी बात है। कहीं, ऐसा तो नहीं कि कोई छात्र या कर्मचारी इसकी लत में पड़ गया हो। उन्हें बचाना अहम बात है। इसलिए अपील की गई है कि ऐसे व्यक्ति को नशा से दूर रखने के लिए चिह्नित करना जरूरी है।
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पौधों की जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन से आंतरिक रिपोर्ट मांगी है। राजस्थान और मध्यप्रदेश से संबंध रखने वाले कर्मचारी और छात्रों की भी सूचना मांगी है। हेल्पनाइन नंबर भी जारी किया गया है। जिससे गोपनीय तरीके से सूचना पुलिस तक पहुंच सकें।
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मनोज कुमार, प्रभारी नारकोटिक्स सेल।
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