होली रंगों का त्योहार है, लेकिन जश्न के दौरान हुड़दंगबाजी और लापरवाही के कारण लोगों की जान खतरे में आ गई। दुल्हेंडी के दिन ट्राॅमा सेंटर आंखों में रंग जाने, हादसे और हुड़दंगबाजी में घायल होने वालों की संख्या आम दिनों के मुकाबले दोगुनी हो गई।
पीजीआई के ट्राॅमा सेंटर में दुल्हेंडी के दिन 512 मरीज इलाज करवाने के लिए पहुंचे, जबकि आम दिनों में ट्रामा सेंटर में इलाज करवाने वालों की संख्या 300 के आसपास रहती थी। बढ़े हुए लगभग 200 मरीजों में से दुल्हेंडी पर तेज रफ्तार और लापरवाही के साथ वाहन चलाने के लगभग 50 मामले सामने आए। इसके अलावा, होली पर हुड़दंग के दौरान मारपीट के कारण लगभग 90 घायल इलाज करवाने के लिए पहुंचे। इसमें सामान्य रूप से घायलों का इलाज कर घर भेज दिया गया, वहीं गंभीर रूप से घायलों का इलाज ट्राॅमा सेंटर में किया जा रहा है। होली पर अक्सर आंखों में रंग जाने का खतरा बना रहता है। रंगों के कारण आंखों में जलन और संक्रमण 60 लोग इलाज करवाने के लिए पहुंचे। होली के दौरान आपात स्थिति को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग और पीजीआई में 13, 14, 15 मार्च को आपातकालीन विभाग और ट्राॅमा सेंटर में अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती की गई थी।
होली पर आपात स्थिति के लिए 13, 14 ,15 मार्च को अतिरिक्त चिकित्सकों की नियुक्ति की गई थी, ताकि सभी को इलाज मिल सके। किसी को पेरशानी का सामना ना करना पडे़।
- डॉ. वरुण, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआई रोहतक