रोहतक। मासूम बेटे संतोष (8) का शव देखकर सिविल अस्पताल में मां नगीना फूट-फूटकर रोई। बोलीं-संतोष मेरा सबसे प्यारा बेटा था। प्लाॅट में भरे पानी में डूबने से जान चली गई। वह तो भाइयों के साथ पानी पर तैर रहा प्लास्टिक का खिलौना ही तो निकाल रहा था।
बेबसी भरी आंखों से पति उमा सिंह की तरफ देखकर बोलीं-मेरा बेटा आंखें क्यों नहीं खोल रहा है। वो मुझे छोड़कर कहां चला गया। उसे वापस लेकर आओ। पत्नी की यह हालत देखकर पति की आंखों में भी आंसू बह निकले और कुछ जवाब नहीं दे पाए। फिर पास में खड़े कुछ लोग पीड़ित मां को सांत्वना दे रहे थे।
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एएसआई नरेंद्र की गर्दन तक आ गया पानी
सिटी थाने से सूचना पाकर एएसआई नरेंद्र, ईएचसी प्रदीप व फायर कर्मी अंकित मौके पर पहुंचे। प्लॉट के अंदर घुसकर 15 मिनट तक संतोष को तलाश करते रहे। आखिर में प्लॉट के अंदर बने गड्ढे में पांच-छह फीट की गहराई में संतोष बेहोशी की हालत में मिला। एएसआई नरेंद्र जब उसे निकालने लगा तो उनकी गर्दन तक पानी आ गया। वे कंधे पर संतोष को लेकर पानी से बाहर आए। तुरंत उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इंस्पेक्टर रमेश कुमार का कहना है कि बच्चे की मौत को हादसा मानकर शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने कोई शिकायत नहीं दी है।