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खून से लथपथ बेटे को पहचान नहीं पाई मां, फिर सिर में लगी पुरानी चोट देख बोलीं-ये तो मेरा निखिल है

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मां का दर्दः घर पर बेटे निखिल को स्कूल में चोट लगने की सूचना के बाद मां कविता पीजीआई के ट्रामा सें?
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मानव रचना ग्लोबल स्कूल में हुए हादसे की स्कूल प्रबंधन की ओर से परिजनों को सूचना दी गई। जिसमें स्कूल प्रबंधन ने बताया था कि आधी छुट्टी के दौरान खेल खेल में निखिल को चोट लग गई है, उसे इलाज के लिए पीजीआई ले जा रहे है। वहीं आ जाओ। सूचना मिलते ही मां कविता अपने भाई सोनू व अन्य परिजनों के साथ दौड़ती हुई पीजीआई ट्रामा सेंटर पहुंची। वहां पहुंचने के बाद मां ने बेटे निखिल से मिलवाने के लिए डॉक्टरों से आग्राह किया। मां ने बताया कि जब उसने निखिल को खून से लथ पथ हालत में स्टेचर पर पड़ा हुआ देखा, तो मैं घबरा गई। उसे लगातार देखने के बाद भी वह उसे नहीं पहचान पाई। कुछ देर बाद उसके सिर पर लगी पुरानी चोट के निशान देखकर मां बोली, ये तो मेरा निखिल है। इसके बाद मां जोर जोर से रोने लगी। डॉक्टरों ने मां को कहा कि वह निखिल का इलाज कर रहे है। अभी बाहर चले जाओ। बेटे के इलाज की बात सुनते हुए मां एक उम्मीद के साथ ट्रामा सेंटर से बाहर आ गई और जमीन पर बैठकर बेटे के ठीक होकर बाहर आने का इंतजार करने लगी।
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ढाई माह पहले भी गिरा था गोल पोस्ट, स्कूल प्रशासन ने नहीं ली सुध
सुनारिया रोड स्थित मानव रचना ग्लोबल स्कूल में बुधवार दोपहर आधी छुट्टी के समय 13 साल का आठवीं कक्षा का छात्र निखिल संदिग्ध परिस्थितियों में ग्राउंड में लगे फुटबाल गोल पोस्ट के नीचे दबने मौत हो गई। हादसे के बाद मृतक निखिल की छोटी बहन रौनक ने बताया कि वह भी ग्राउंड में खेल रही थी। लेकिन जब उसका भाई गोल पोस्ट के नीचे दबा, उस वक्त वह अपनी सहेलियों के साथ ग्राउंड के दूसरी ओर थी। भाई के चोट लगने की बात उसे उसकी सहेलियों ने बताई। जिसके बाद वह वहां गई तो देखा कि उसके भाई के मुंह से खून निकल रहा है। रौनक ने बताया कि ग्राउंड में लगा यह फुटबाल का गोल पोस्ट करीब ढाई माह पहले भी ऐसे ही गिर गया था। हालांकि उस समय हादसा टल गया था। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने इसकी सुध नहीं ली और बुधवार को उसका भाई उसे छोड़ कर चला गया।
और भी बच्चे आ सकते थे चपेट में
स्कूल प्राचार्य के मुताबिक हादसे के वक्त गोल पोस्ट के पास और भी कई बच्चे खेल रहे थे। कोई बच्चा गोल पोस्ट के पास खेल रहा था, कोई गोल पोस्ट के ऊपर लटक रहा था। इसी दौरान यह गोल पोस्ट गिर गया। प्राचार्य महोदय, अगर ऐसा है तो शुक्र मनाइए। क्योंकि यह हादसा और भी बड़ा हो सकता था। गोल पोस्ट के आस पास खेल रहे बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते थे।
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आधी छुट्टी सवा 11 बजे हुई थी। इस दौरान मैं स्कूल के मेन गेट पर बने कमरे में चाय पी रहा था। करीब पौने 12 बजे आधी छुट्टी बंद होने के सिटी बजाई गई। सिटी बजने के बाद ग्राउंड में खेल रहे सभी बच्चे हमेशा की तरह दौड़ते हुए अपनी-अपनी कक्षाओं की ओर जाने लगे। बच्चे जाते हुए गोल पोस्ट को हाथ मारते हुए भाग रहे थे। कुछ बच्चे पहले से ही गोल पोस्ट के पास खेल रहे थे। इसी दौरान मैंने देखा कि अचानक गोल पोस्ट नीचे गिर गया था। मैं यह देखते ही दौड़ पड़ा। नजदीक जाने के बाद देखा कि गोल पोस्ट के नीचे एक छात्र दबा हुआ था। हादसा का पता चलते ही स्कूल की अध्यापिकाएं भी मौके पर पहुंची और उसे तुरंत पीजीआई के लिए ले जाया गया। कुछ देर बाद ही स्कूल की जल्दी छुट्टी कर दी गई थी।
- जैसा स्कूल के गेटमैन सतबीर ने बताया
डीईओ बोलीं- स्कूल प्रबंधन की नहीं लापरवाही, बच्चे के साथ अनहोनी थी, जो उस पर आ गई
प्राचार्य का दावा : सितंबर में लगवाया था गोल पोस्ट, जमीन में दबाया गया था, बच्चों ने खेल-खेल में निकाल दिया
हकीकत : जर्जर हाल गोल पोस्ट जमीन पर ही रखा था
मानव रचना ग्लोबल स्कूल में हुए हादसे में छात्र निखिल की मौत के बाद प्राचार्य ने दावा किया कि गोल पोस्ट को बीते साल सितंबर में लगवाया था और उसे जमीन में दबाया गया था, लेकिन बच्चों ने उसे खेल-खेल में बाहर कर दिया। प्राचार्य के इस बयान की पुष्टि करने के लिए अमर उजाला की टीम स्कूल पहुंची तो देखा कि गोल पोस्ट जमीन में नहीं दबा हुआ था, बल्कि जमीन पर ही रखा हुआ था। यह गोल पोस्ट करीब 400 किलोग्राम वजन के कारण जमीन पर टिका हुआ था। अगर यह जमीन में दबा होता, तो निश्चित ही जमीन पर गड्ढा मिलता। लेकिन वहां की जमीन पूर्णता समतल थी। लोहे का फुटबाल का गोल पोस्ट पांच माह पुराना नहीं, बल्कि सालों पुराना और जर्जर जैसा दिखा।
बता दें कि मानव रचना ग्लोबल स्कूल में बुधवार को आधी छुट्टी के समय में फुटबाल गोल पोस्ट आठवीं कक्षा के छात्र निखिल के ऊपर गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। दर्दनाक हादसे के बाद डीईओ को स्कूल में मौके पर जाकर घटना स्थल का निरीक्षण करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। हालांकि अमर उजाला से बातचीत में डीईओ परमेश्वरी हुड्डा ने कहा कि हादसा काफी दुखदायक है। मैंने फोन पर ही लगातार बातचीत की और सामने आया कि इसके लिए स्कूल प्रबंधन जिम्मेदार नहीं है। यह महज एक हादसा है। यह बच्चे के साथ अनहोनी थी, जोकि उस पर आ गई।
वहीं स्कूल प्राचार्य धर्मबीर ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह गोल पोस्ट सितंबर माह में ही लगवाया गया था। पोस्ट को जमीन में भी गाड़ा गया था। अभी ग्राउंड तैयार किया जा रहा था। इसमें गेम भी नहीं करवाई गई थी। आने वाले कुछ दिनों में इसे शुरू किया जाना था, लेकिन बच्चों ने खेल-खेल में इसे जमीन से बाहर निकाल दिया होगा। आधी छुट्टी के वक्त गोल पोस्ट के इर्द-गिर्द काफी बच्चे खेल रहे थे। कुछ बच्चे उस पर लटके भी हुए थे। इसी कारण वह गिर गया और यह हादसा हो गया।
ये मुख्य सवाल, जो स्कूल प्रबंधन की दर्शा रहे लापरवाही
- गोल पोस्ट को आखिर जमीन में क्यों नहीं गाड़ा गया था, या गोल पोस्ट को किसी सहारे क्यों नहीं खड़ा किया गया था
- ग्राउंड में डीपी भी मौजूद थे। डीपी ने बच्चों को गोल पोस्ट के पास जाने से क्यों नहीं रोका
- स्कूल में अधिकांश जगहों पर सीसीटीवी लगे हुए हैं, लेकिन ग्राउंड की ओर कोई सीसीटीवी नहीं लगाया गया
- ढाई माह पहले भी गिरा था गोल पोस्ट, उसके बाद भी स्कूल प्रबंधन ने क्यों सुध नहीं ली
एक होता है पोर्टेबल गोल पोस्ट जिसमें पीछे होती है स्पोर्ट, दूसरा जमीन में गाड़ने वाला
रोहतक के जिला खेल अधिकारी सुखबीर सिंह एक फुटबाल खिलाड़ी भी रहे हैं। जिन्होंने फुटबाल गोल पोस्ट के नियमों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि गोल पोस्ट दो ही तरह का होता है। जिसमें एक पोर्टेबल और दूसरा जो जमीन में गाड़ा जाता है। पोर्टेबल में पीछे एक स्पोर्ट होती है, ताकि वह सही से टीका रहे। जमीन में गाड़ने वाले गोल पोस्ट को दो फीट तक जमीन में दबाया जाता है। गोल पोस्ट की लंबाई आठ फीट व चौड़ाई 24 फीट होती है। वहीं पाइप पांच इंच मोटी होती है। इसके वजन की मेजरमेंट नहीं होती, लेकिन लोहे का ही होना जरूरी है। इसके अलावा पोर्टेबल को एंगल से लॉक या फिर स्पोर्ट पर अधिक वजन से जोड़ा जा सकता है।
स्कूल के गोल पोस्ट में न स्पोर्ट थी न ही जमीन में दबाया गया था
उधर, अमर उजाला की टीम ने स्कूल में जो गोल पोस्ट देखा उसके बेस में पीछे की तरफ कोई स्पोर्ट नहीं थी। दो फीट जमीन में चिनाई तो दूर एक इंच भी जमीन में नहीं गाड़ा गया था। न ही कोई एंगल लॉक था। इतना ही नहीं रखा भी ऊबड़ खाबड़ जमीन पर था। गोल पोस्ट की लंबाई आठ फीट के करीब ही नजर आ रही थी, अगर गोल पोस्ट पोर्टेबल है तो उसके पीछे स्पोर्ट होना जरूरी था। पोर्टेबल नहीं था तो जमीन में गड़ा होना जरूरी था।
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